चक जोगीवाला क्षेत्र में गुलदार की दहशत बरकरार,वन विभाग अब भी नींद में
ऋषिकेश : चकजोगीवाला क्षेत्र में गुलदार की लगातार चहलकदमी से ग्रामीण डर-डरकर जी रहे हैं, लेकिन वन विभाग की कार्यशैली देखकर ऐसा लगता है मानो विभाग को इस खतरे से नहीं, बल्कि फाइलों में टिक मार्क लगाने से ज्यादा लगाव है। जंगल से सटे इस क्षेत्र में रोज शाम ढलते ही गुलदार खुलेआम घूमता नजर आ रहा है। हालत ये है कि सड़कें सुनसान और घरों में लोग कैद—पर वन विभाग की गश्त न तो दिखती है और न ही कोई ठोस कार्रवाई।
ताज़ा घटना में गुलदार की सड़क पर टहलती तस्वीरें सीसीटीवी में साफ कैद हुई हैं, लेकिन वन विभाग की प्रतिक्रिया वही घिसी-पिटी—“निगरानी बढ़ाई जा रही है।” ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर ये निगरानी होती कहाँ है? क्योंकि जमीन पर तो स्थिति उलटी दिखती है—गुलदार बढ़ रहे हैं, डर बढ़ रहा है और विभाग की सक्रियता लगातार घट रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग शाम होते ही घरों में बंद रहने को मजबूर हैं। कई बार गुलदार घरों के बिल्कुल करीब तक पहुंच चुका है, लेकिन विभाग की ओर से न तो पिंजरा लगाया गया, न चेतावनी बोर्ड, न गश्त। विभाग के अधिकारी केवल औपचारिक बयान देकर चलते बनते हैं |
चकजोगीवाला क्षेत्र बड़कोट रेंज और राजाजी टाइगर रिजर्व की सीमा से सटा है, ऐसे में वन विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। पास की मशरूम फैक्ट्री में देर रात तक काम करने वाले कर्मचारी भी दहशत में हैं, लेकिन उनके लिए भी सुरक्षा इंतज़ामों का कोई नाम-निशान नहीं।
ग्रामीणों ने कड़ा आरोप लगाया है कि वन विभाग हर साल बजट आने तक “घटना का इंतज़ार” करता है। लोगों का कहना है कि यदि किसी दिन कोई बड़ी दुर्घटना हो गई, तो जिम्मेदार कौन होगा? विभाग अभी भी कार्रवाई नहीं करता तो इसे लापरवाही नहीं, लापरवाही की सीमा कहा जाएगा।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सवाल साफ है—गुलदार तो अपना इलाका बढ़ा रहा है, पर वन विभाग आखिर कब जागेगा?




