✍️ मनमोहन भट्ट, उत्तरकाशी।
खबर उत्तरकाशी से है जहां पर जनपद के विभिन्न विद्यालयों में D.El.Ed प्रशिक्षुओं द्वारा बाल शोध मेला उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। इस आयोजन में बच्चों ने विज्ञान, भाषा, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण तथा गणित से जुड़े नवाचारपूर्ण मॉडल और गतिविधियों का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षुओं ने पूरे मनोयोग से कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की, बच्चों को मार्गदर्शन दिया और मेले को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ये वही D.El.Ed प्रशिक्षु हैं, जो उत्तराखंड सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में जारी नीतियों में स्थानीय प्रशिक्षुओं को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर अन्य राज्यों तथा NIOS D.El.Ed धारकों को प्राथमिकता देने जैसे निर्णयों से प्रशिक्षुओं में रोष व्याप्त है।
प्रशिक्षुओं का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत, समय और संसाधन लगाकर प्रशिक्षण प्राप्त किया, लेकिन अब उनके भविष्य पर अनिश्चितता छा गई है। उनका आरोप है कि सरकार स्थानीय युवाओं की उपेक्षा कर बाहरी अभ्यर्थियों को अवसर दे रही है, जो प्रदेश के युवा हितों के प्रतिकूल है।
प्रशिक्षुओं ने सरकार से मांग की है कि—
स्थानीय D.El.Ed प्रशिक्षुओं को प्राथमिकता दी जाए,
NIOS D.El.Ed धारियों की भर्ती पर स्पष्ट मानक तय हों,
प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके युवाओं के लिए न्यायपूर्ण एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
बाल शोध मेले की सफलता जहाँ प्रशिक्षुओं की योग्यता और समर्पण को दर्शाती है, वहीं उनकी समस्याएँ राज्य के शिक्षा विभाग की नीतियों पर सवाल खड़े करती हैं।





