✍️ मनमोहन भट्ट, उत्तरकाशी।
तांबाखानी सुरंग के समीप बनाए गए अवैध कूड़ा डंपिंग जोन के खिलाफ चल रहा जन-आंदोलन गुरुवार को 64वें दिन में पहुंच गया, लेकिन प्रशासन की उदासीनता जस की तस बनी हुई है। दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो अवैध डंपिंग जोन हटाया गया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था पर कोई ठोस कार्यवाही की गई। अब इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे पर नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (NUJ उत्तराखंड) ने खुलकर मोर्चा संभालते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है।
धरना स्थल पर पहुंचे यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष दया जोशी, मार्गदर्शक एवं संरक्षक त्रिलोक चंद्र भट्ट और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद कुमार ने सामाजिक कार्यकर्ता गोपीनाथ रावत के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि यह संघर्ष अब केवल स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता के खिलाफ जनघोषणा बन चुका है।
धरने को संबोधित करते हुए त्रिलोक चंद्र भट्ट ने कहा कि उत्तरकाशी विश्व धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र है, जहां से चारधाम यात्रा का मुख्य मार्ग गुजरता है, लेकिन इसी पवित्र नगरी के प्रवेश द्वार पर कूड़े का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। यह न केवल तीव्र दुर्गंध फैला रहा है, बल्कि देवभूमि की आस्था, छवि और गरिमा पर सीधा प्रहार है। उन्होंने चेताया कि पॉलीथीन और प्लास्टिक का यह ज़हर जल, थल और वायु — तीनों को प्रदूषित कर मानव जीवन के साथ-साथ मूक पशुओं के लिए भी मौत का कारण बनता जा रहा है।
यूनियन पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि केवल कागजी खानापूर्ति से पर्यावरण संरक्षण नहीं होता। उत्तरकाशी जैसी घनी आबादी और संवेदनशील क्षेत्र में तांबाखानी को डंपिंग जोन बनाना सीधे तौर पर पर्यावरणीय कानूनों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। 64 दिन बीत जाने के बावजूद तिलोथ स्थित स्थायी ट्रेंचिंग ग्राउंड के निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल न होना प्रशासनिक निष्क्रियता और लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है।
धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही अवैध डंपिंग जोन को हटाकर वैज्ञानिक ढंग से कूड़ा निस्तारण की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे उत्तराखंड) ने ऐलान किया कि इस जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े गंभीर मुद्दे को शासन स्तर से लेकर केंद्रीय मंच तक मजबूती से उठाया जाएगा। पत्रकारों के इस निर्णायक समर्थन से आंदोलन को नई धार मिली है और अब प्रशासन पर तत्काल ठोस निर्णय लेने का दबाव निर्णायक रूप से बढ़ गया है।




