✍️ मनमोहन भट्ट,देहरादून/हरिद्वार।
उत्तराखण्ड में कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ते फर्जी और तथाकथित न्यूज पोर्टलों पर नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे उत्तराखण्ड) ने गंभीर चिंता जताते हुए इन्हें पत्रकारिता की आड़ में संचालित संगठित अपराध करार दिया है। यूनियन ने मुख्यमंत्री, सूचना सचिव और महानिदेशक सूचना का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा है कि राज्य में अनेक न्यूज पोर्टल पत्रकारिता की मर्यादा को ताक पर रखकर धोखाधड़ी, कूटरचना, अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और साइबर अपराध जैसे गैरकानूनी कृत्यों में संलिप्त हैं।
एनयूजे उत्तराखण्ड की ओर से राज्य के शीर्ष अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों की भूमिका जनहितकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण है, लेकिन न्यूज पोर्टलों के लिए ठोस मानक और प्रभावी नियंत्रण के अभाव में प्रदेश में अनियंत्रित पोर्टलों की बाढ़ आ गई है। इन तथाकथित पोर्टलों द्वारा मनमाने ढंग से खबरें प्रसारित कर पत्रकारिता की गरिमा को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा रहा है।


यूनियन के मार्गदर्शक वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोक चन्द्र भट्ट ने मुख्यमंत्री सहित सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जिला सूचना अधिकारियों को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि कई न्यूज पोर्टल बिना किसी प्रमाण के झूठे, मनगढ़ंत और काल्पनिक आरोप लगाकर सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों और संस्थाओं की छवि धूमिल कर रहे हैं। इनका उद्देश्य निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए वर्षों से स्थापित सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है।
भट्ट ने कहा कि भ्रामक और तथ्यहीन खबरों के माध्यम से जनता के बीच नफरत और विद्वेष फैलाने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी आंकड़े और झूठे तथ्यों के सहारे शासन-प्रशासन को गुमराह कर सरकारी विज्ञापन हासिल किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर राजकीय कोष के साथ धोखाधड़ी है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि पत्रकारिता के नाम पर विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ अर्जित करना और ब्लैकमेलिंग करना इन पोर्टल संचालकों की कार्यशैली बन चुकी है। इंटरनेट के माध्यम से अवैध प्रचार और साइबर अपराध कर समाज में अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और भारतीय न्याय संहिता की मानहानि एवं जालसाजी से संबंधित धाराओं के अंतर्गत गंभीर संज्ञेय अपराध हैं।
एनयूजे उत्तराखण्ड ने मांग की है कि पत्रकारिता की शुचिता बनाए रखने के लिए न्यूज पोर्टलों का अनिवार्य विभागीय पंजीकरण, सूचीबद्धता और संचालन हेतु कठोर मानक तय किए जाएं। साथ ही, ब्लैकमेलिंग और समाज में विद्वेष फैलाने वाले पोर्टलों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। यूनियन ने दागी और फर्जी पोर्टलों को तत्काल ब्लैकलिस्ट व ब्लॉक करने, उनके सरकारी विज्ञापन बंद करने और पूर्व में दिए गए विज्ञापनों की वसूली की भी मांग उठाई है।
इसके साथ ही, साइबर सेल के माध्यम से ऐसे पोर्टलों के खिलाफ FIR दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा पीड़ित व्यक्तियों और संस्थाओं की शिकायत सुनने के लिए राज्य में एक सक्षम और अधिकार सम्पन्न तंत्र विकसित करने की मांग की गई है, ताकि डिजिटल मीडिया समाज के निर्माण का माध्यम बने, न कि विनाश का।




