✍️ सुभाष पिमोली थराली।
थराली के आलकोट–झिंझोली सहित समस्त फ्याल दे क्षेत्र के सहयोग से आयोजित बिनसर महोत्सव का भव्य और रंगारंग शुभारंभ राजकीय इंटर कॉलेज आलकोट के खेल मैदान में पूरे पारंपरिक उल्लास और आस्था के साथ हुआ। तीन दिवसीय इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मेले के पहले ही दिन पूरा क्षेत्र उत्सवमय हो उठा। दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और बच्चे मेले में पहुंचे और अपने आराध्य बिनसर महादेव के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया।
महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक शिला पूजन और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। इस दौरान पुजारी और पुरोहितों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ बिनसर महादेव का आह्वान किया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली तथा अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से ओतप्रोत नजर आया। पूजा कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन सेवानिवृत्त खंड विकास अधिकारी देवी दत्त उनियाल ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बिनसर महादेव इस पूरे फयाल दे क्षेत्र के आराध्य देव हैं और इस भूमि को उनकी तपस्थली के रूप में जाना जाता है। यहां के लोग पीढ़ियों से उन्हें अपना रक्षक और मार्गदर्शक मानते आए हैं और आज भी उनकी कृपा से ही यह क्षेत्र सुरक्षित और समृद्ध बना हुआ है।
पूजा-अर्चना के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ सेवानिवृत्त फार्मासिस्ट मोहनलाल आर्य ने रिबन काटकर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बिनसर महादेव मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बीते कई वर्षों से यह मेला स्थानीय लोगों के सहयोग से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे और व्यापक स्वरूप दिया जाए। इसके लिए सरकार से राजकीय सहायता लेने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे और मेले को राजकीय मेला घोषित कराने की पहल भी की जाएगी, ताकि इसकी पहचान और सुविधाएं दोनों बढ़ सकें।
इस अवसर पर राजकीय इंटर कॉलेज आलकोट की छात्राओं और किशोरी दलों ने मुख्य अतिथियों का पारंपरिक गीतों और नृत्यों के साथ स्वागत किया। उनके कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरे परिसर में लोकसंस्कृति की खुशबू फैल गई। महिला मंगल दलों ने भी झोड़ा, चांचरी, चौफुला और जागर जैसे लोकगीतों और नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। लोकधुनों और पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की प्रस्तुतियों से पूरा मेला स्थल देवमय और सांस्कृतिक रंगों से भर गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
मेले में लगाए गए विभिन्न विभागों और स्वयं सहायता समूहों के स्टाल भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने रहे। स्वयं सहायता समूहों ने अपने स्थानीय उत्पादों, खासकर मोटे अनाज, दालें, आटा, पहाड़ी मसाले और पारंपरिक खाद्य सामग्री का प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोग इन स्टालों पर खरीदारी करते नजर आए। समूहों से जुड़ी महिलाएं आगंतुकों को मिलेट्स और पहाड़ी उत्पादों के पोषण संबंधी लाभों की जानकारी भी दे रही थीं, जिससे लोगों में स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूकता बढ़ी। इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर भी मिला और उनके उत्पादों को नया बाजार भी मिला।
पशुपालन विभाग ने पशुओं में होने वाली बीमारियों, उनके उपचार, टीकाकरण और बेहतर देखभाल की जानकारी दी। किसानों और पशुपालकों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं का समाधान भी जाना। समाज कल्याण विभाग ने सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी, जिससे पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ उठाने के प्रति जागरूक किया गया। स्वास्थ्य विभाग की आशा कार्यकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य जांच, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा स्वच्छता से जुड़े सुझाव दिए, जिससे लोगों को काफी लाभ मिला।
मेले में आलकोट, झिंझोली, भटियाणा, मैटा, बजवाड़, पास्तोली, नैल, ढालू सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। दूर-दराज से आए ग्रामीणों ने मेले में एक-दूसरे से मुलाकात कर सामाजिक मेलजोल भी बढ़ाया। मेले के संरक्षक डीडी उनियाल अध्यक्ष देवेंद्र कडारी कार्यकारी अध्यक्ष भूधर नेगी, मीडिया प्रभारी केशर सिंह नेगी, भुवन चंद्र चंद्र जोशी करण सिंह नेगी ,सुरेंद्र नेगी ,खुशाल कडारी दरवान नेगी, भुवन चंद्र जोशी, निलेश जोशी प्रधान धीरेन्द्र कडारी, राकेश जोशी , सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रमेश जोशी निलेश जोशी उमेश जोशी महिला बाल विकास की प्रेमा रावत अनीता रावत पूजा रजवार दुर्गा जोशी महेशी देवी पार्वती देवी गणमान्य लोग आयोजन में उपस्थित रहे और व्यवस्थाओं की सराहना की।
तीन दिनों तक चलने वाले इस बिनसर महोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोककला प्रदर्शन और विभिन्न सामाजिक गतिविधियां लगातार आयोजित की जाएंगी। आयोजकों के अनुसार आने वाले दिनों में बच्चों और युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताएं, महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम और सांस्कृतिक संध्याएं भी होंगी। इससे न केवल क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति को मंच मिलेगा, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को भी अपनी कला दिखाने का अवसर प्राप्त होगा। बिन्सर महोत्सव एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे फयाल दे क्षेत्र की पहचान और सामाजिक एकता का उत्सव है।मच संचालन संरक्षक नारायण बिष्ट ने किया।




