✍️ सुभाष पिमोली थराली।
कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालदम में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अन्तर्गत प्राकृतिक खेती विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कृषि विभाग, चमोली एवं कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालदम के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।
यह पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालदम के वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती के नोडल अधिकारी डॉ. डी. सी. काला के नेतृत्व में संचालित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डॉ. काला द्वारा प्राकृतिक खेती की सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक दोनों पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण में नंदा नगर (घाट) विकासखंड के 16 क्लस्टरों से चयनित 32 कृषि सखियों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती के विविध पक्षों में दक्ष बनाना था, जिससे वे आगे चलकर अपने क्षेत्रों के कृषकों को भी प्रभावी रूप से प्रशिक्षित कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान फार्मर मास्टर ट्रेनर रतन सिंह गड़िया, सहित प्राकृतिक खेती का अभ्यास कर रहे कृषकों के प्रक्षेत्रों पर भ्रमण कराया गया, जहाँ कृषि सखियों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से खेत पर देखकर और सीखकर समझा।
साथ ही डॉ. डी. सी. काला के मार्गदर्शन में, कृषि सखियों ने कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में प्राकृतिक खेती के मुख्य अवयव
बिजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, दशापर्णी अर्क, कुणपजल, सौंठास्त्र,
आदि का स्वयं निर्माण कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक कृषि सिद्धांतों, पद्धतियों, जैविक घोल निर्माण, मृदा-स्वास्थ्य संवर्धन, लागत-घटाओ–उपज-बढ़ाओ तकनीक, तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने अपेक्षा व्यक्त की कि प्रशिक्षित कृषि सखियाँ अपने क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाएँगी।




