✍️ वाचस्पति रयाल, नरेंद्रनगर।
विगत 15 व 16 सितंबर की भारी बारिश ने डौंर गांव में तबाही मचा कर रख दी।
खेत-खलियान, खेतों में खड़ी फसलें ,मकान-चौक, संपर्क मार्गों को जोड़ने वाली तीन पुलिया, जूनियर हाई स्कूल का भवन, फर्नीचर, शौचालय, किचन, पेयजल पाइप लाइनें, विद्युत पोल मलबे की ढेर में तब्दील हो गये,
ग्रामीणों का कहना है की रात भर विद्युत आपूर्ति ठप रही, किसी तरह उन्होंने रात अंधेरे में काटी, और जब सुबह उठे, तो गांव में खौफनाक तबाही का मंजर देख, उन्हें वर्ष 2011 में गांव में आई भीषण आपदा की तस्वीरें याद हो आई,
बताते चलें की डौंर गांव में 11 सितंबर 2011 को पहाड़ टूटकर पानी के सैलाब, आधे गांव को ही बहा कर ले गया था,
इस बड़े हादसे में गांव की 6 जिंदगियां मलबे की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा गए, कई मवेशियों की मलबे में दब कर मौत हो गई,
बेसिक और जूनियर हाई स्कूल दोनों स्कूलों के आपदा की चपेट में आने और मलबे की ढेर में बदलने पर गांव के बच्चों को पठन-पाठन की बड़ी समस्या पैदा हो गई है,
ग्रामीणों ने शासन/प्रशासन से गांव की व्यवस्थाओं को ठीक करने के साथ विस्थापन की मांग की है।





