✍️ मनमोहन भट्ट, उत्तरकाशी।
उत्तरकाशी जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य ने सोमवार को जल संस्थान व पेयजल निगम की पेयजल व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए गर्मियों में जल स्रोतों के सूखने और घरेलू जल कनेक्शनों के व्यावसायिक उपयोग से संभावित जल संकट के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि घरेलू कनेक्शन से व्यवसायिक गतिविधियों में पानी का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ चालानी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे उपभोक्ता जिन्होंने मुख्य पेयजल योजनाओं से सीधे मोटर स्थापित कर पानी खींच रखा है,उनके विरुद्ध भी कार्रवाई करते हुए चालान किए जाए।
बैठक में बताया गया कि कई बड़े उपभोक्ताओं द्वारा पेयजल बिलों का बकाया अभी तक जमा नहीं किया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने बड़े बकायेदारों के खिलाफ आरसी काटने और वसूली प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने जल संस्थान को बिलिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और सरल बनाने के निर्देश दिए,ताकि उपभोक्ताओं को समय पर बिल चुकाने में आसानी हो सके। साथ ही उन्होंने ऐसे एकल ग्राम पंचायतों की पहचान कर जिला योजना के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर भी कार्य करने को कहा। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पानी की समस्या से जूझ रहे ज्ञानसू, गंगोरी, मोरी और पुरोला क्षेत्रों में ट्यूबवेल बनने से लोगों को राहत मिली है और इन चारों स्थानों पर ट्यूबवेल चालू हो चुके हैं। इसके अलावा मनेरा और मातली में भी शीघ्र ट्यूबवेल निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं रवाड़ा में आपदा से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन के पुनर्निर्माण के लिए जल संस्थान को एक करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हो चुकी है, जिस पर जल्द ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
बैठक अधिशासी अभियंता जल संस्थान एलसी रमोला,ईई पुरोला विनोद पांडेय,ईई पेयजल निगम मधुकांत कोटियाल,जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी अतुल आनंद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।




