✍️ सुभाष पिमोली थराली।
नंदा राजजात यात्रा के पड़ाव कुलसारी में पौराणिक सूर्य मंदिर विराजमान है, जिसका पौराणिक महत्व है, पुरातत्व विभाग भी इसकी पुष्टि कर चुका है, साथ ही मंदिर वर्तमान समय में जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है और आज तक भी मंदिर का जीणोद्धार का कार्य शुरू नहीं किया गया हैं,जिस कारण स्थानीय लोगों ने पौराणिक सूर्य मंदिर कुलसारी के जीर्णोद्धार की मांग की है।
मंदिर के पुजारी जयंती प्रसाद कुलसारा का कहना है कि यह प्राचीन मंदिर सदियों पुराना है, पहले इस मंदिर के अंदर एक पानी का कुंड विराजमान था और इस कुंड से जो पानी निकलता था, उससे सभी ग्रामीण पानी भी पीया करते थे, और सूर्योदय होने पर सबसे पहले सूर्य की किरण इस मंदिर के शिखर पर पड़ती थी, एक दिन एक गाय का बछड़ा इस कुंड में पानी पीने गया और एक गाय ने बछड़े को धक्का मारा, जिस कारण गाय का बछड़ा इस मंदिर में विराजमान कुंड में डूब गया, तब से मंदिर अशुद्ध हो गया और यहां का पानी भी गायब हो गया, और मूर्तियां भी खंडित हो गई।
पुजारी जयंती प्रसाद कुलसारा का कहना है कि पूर्व में जब मंदिर में हवन हुआ करता था तो उसमें जिस घी का उपयोग किया जाता था जिस घी को लगाने से कई सारे कुष्ठ रोग या अन्य रोगों का उपचार भी किया जाता था।
इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता मोहन राम आर्या ने बताया कि आगामी नंदा राजजात यात्रा होने में कुछ ही समय बचा है, और आज तक भी मंदिर की सुध नहीं ली गई, हम सरकार से यह मांग करते हैं कि जल्द से जल्द इस मंदिर का जीर्णोधार किया जाए और इस मंदिर को पुनर्स्थापित किया जाए।
इस संबंध में ग्रामीण खिलाफ सिंह बिष्ट पूर्व प्रधान कुलसारी, मनीष सती पूर्व प्रधान कुलसारी, सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल भंडारी, नित्या नेगी, कपूर सिंह रावत, अवतार दानू, दीपक सती, पंकज रावत,देवी सती, गिरीश चमोला,लक्ष्मी प्रसाद सती, दिनेश गोड़, आदि लोगों ने मंदिर के जीणोद्धार की मांग की है।




