सशक्त भू-कानून को चुनौती? ऐराड़ी गांव में 112 नाली जमीन खरीद पर उठे सवाल, हाउसिंग सोसायटी के प्रचार से ग्रामीणों में आक्रोश
कोटद्वार/पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के सशक्त भू-कानून को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पौड़ी गढ़वाल जिले के कोट ब्लॉक की सितोनस्यूं पट्टी स्थित ऐराड़ी गांव में 112 नाली भूमि की खरीद-फरोख्त को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि दस्तावेजों में भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए दर्शाया गया है, जबकि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में उसी भूमि पर “व्हिस्परिंग पाइन” नाम से हाउसिंग सोसायटी विकसित किए जाने का प्रचार किया जा रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, बीते जुलाई माह में गांव के 12 ग्रामीणों ने अपनी 112 नाली भूमि दून हैचरीज लिमिटेड, नई दिल्ली को बेची है। भूमि खरीद कंपनी के निदेशक और यमकेश्वर ब्लॉक के कोठार-दिउली निवासी एक स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से की गई। ग्रामीणों का दावा है कि कुल 144 नाली भूमि का सौदा प्रस्तावित है, जिसमें से 112 नाली की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है।
सामाजिक कार्यकर्ता रोहित भट्ट ने आरोप लगाया कि भू-कानून में मौजूद खामी का फायदा उठाकर बाहरी कंपनियां स्थानीय लोगों को माध्यम बनाकर बड़े पैमाने पर भूमि खरीद रही हैं। उनका कहना है कि सरकार दावा करती है कि प्रदेश के 11 जिलों में बाहरी व्यक्ति बिना अनुमति 250 वर्ग मीटर से अधिक भूमि नहीं खरीद सकता, लेकिन स्थानीय व्यक्ति को माध्यम बनाकर इस प्रावधान को दरकिनार किया जा रहा है।
रोहित भट्ट ने यह भी कहा कि इंटरनेट मीडिया पर पिछले कुछ महीनों से इसी भूमि पर “व्हिस्परिंग पाइन” नाम से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का प्रचार किया जा रहा है। इसमें 20 फीट चौड़ी सड़क, प्लॉटिंग और लगभग 30 प्रतिशत प्लॉट बिकने जैसे दावे किए जा रहे हैं, जबकि भूमि खरीद के दस्तावेजों में कृषि उपयोग का उल्लेख है।
ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण को पहाड़ की पुश्तैनी जमीन को धीरे-धीरे निजी कंपनियों के कब्जे में पहुंचाने का नया तरीका बताया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा भू-कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने की मांग की है।
प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच की जा रही है। यदि भूमि उपयोग, खरीद प्रक्रिया या अन्य किसी नियम का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

