✍️ वाचस्पति रयाल, नरेंद्रनगर।
विकास खंड नरेंद्रनगर के अंतर्गत 35 से 40 परिवारों वाले गांव नसोगी में मां बाल कुंवारी भगवती का बरसों -बरसों से छोटा जीर्ण-शीर्ण बहुत पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कर 37 लाख से अधिक लागत का भव्य मंदिर बनाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के एक प्रौढ़ व्यक्ति के सपने में आकर मां बाल कुंवारी भगवती ने मंदिर जीर्णोद्धार करने का संदेश दिया,बस फिर क्या था गांव के ग्रामीणों में एकता,आस्था व समर्पण का ऐसा भाव जाग उठा कि उन्होंने क्षेत्र की रक्षक, ईस्ट देवी व कुलदेवी के रूप में पूजे जाने वाली मां बाल कुंवारी का 37 लाख से अधिक लागत का भव्य मंदिर का निर्माण कर डाला।
मंदिर के गर्भ गृह में मां की मूर्ति स्थापित करने के लिए यज्ञाचार्य रमेश उनियाल, आचार्य मुकुंदी राम कपूरूवान, आचार्य हेतराम कपरूवान, पंडित प्रमोद कुलियाल व पंडित दीक्षांत डंगवाल के द्वारा तीन दिनों का विधि विधान पूर्वक व मंत्रोचार के साथ मां बाल कुंवारी भगवती की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा का अनुष्ठान करते हुए मूर्ति में प्राण अर्थात दैवीय शक्ति का वास किया गया।
प्रमुख यज्ञाचार्य रमेश उनियाल ने श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए बताया कि मंत्रोचार व अनुष्ठानों के माध्यम से मूर्ति में प्राण अर्थात दैवीय शक्ति का वास होता है और श्रद्धालु भक्त सीधे आध्यात्म की शक्ति मां से जुड़ सकें।
विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना के साथ, मां की भव्य मूर्ति को कुश, घृत,शहद व पंचामृत से स्नान, सौंदर्य व वस्त्रों से सुसज्जित कर मां की मूर्ति को जय कारों के साथ गर्भगृह में स्थापित किया गया।
यह दृश्य बहुत ही भावुक था, श्रद्धालुओं मे मां के प्रति श्रद्धा, विश्वास व समर्पण की भावना का जुनून देखते ही बनता था।
मां बालकुंवारी अपने पश्वाओं पर अवतरित हो नाचने लगी, श्रद्धालुओं ने मां से सुख, समृद्धि व अमन-चैन की प्रार्थना की। श्रद्धालु भक्त जनों ने मां के दरबार में माथा टेक कर मन्नतें मांगी, मां के जय कारों और घंटियों की आवाज से मंदिर परिसर क्या पूरा गांव गूंज उठा। भंडारे के रूप में मां का प्रसाद ग्रहण कर श्रद्धालु भक्तजन अपने को धन्य मान रहे थे।




