50 वोट की UKD और 2027 के सपने! नरेंद्रनगर निकाय चुनाव ने खोल दी संगठन की हकीकत
नरेंद्रनगर नगर पालिका चुनाव में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) को मात्र 50 वोट मिलना पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। जिस नरेंद्रनगर विधानसभा में UKD के पांच-पांच नेता खुद को 2027 विधानसभा चुनाव का दावेदार बताते हैं, उसी क्षेत्र में निकाय चुनाव में पार्टी का 50 वोटों पर सिमट जाना कई सवाल खड़े करता है।
कभी उत्तराखंड आंदोलन की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही UKD आज अपने ही जनाधार को बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। पार्टी लगातार भू-कानून, मूल निवास, बेरोजगारी और पलायन महिला अपराधों, मजदूर आंदोलनों जैसे जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है, लेकिन चुनावी नतीजे बताते हैं कि इन मुद्दों को वोट में बदलने की क्षमता अभी भी संगठन में दिखाई नहीं दे रही है।
UKD की सबसे बड़ी कमजोरी उसका संगठनात्मक ढांचा बनता जा रहा है। वर्षों से भाजपा और कांग्रेस में बूथ अध्यक्ष तक नहीं बन पाने वाले कई लोगों को UKD ने बड़े-बड़े पद बांट दिए। हालत यह है कि दल में ऐसे पदाधिकारी भी मौजूद हैं जिनके पीछे एक भी सक्रिय कार्यकर्ता नहीं है। पदों की भरमार है, लेकिन जमीन पर कार्यकर्ता और जनसमर्थन नदारद दिखाई देता है।
राजनीति केवल सोशल मीडिया की पोस्ट और प्रेस विज्ञप्तियों से नहीं चलती। चुनाव जीतने के लिए गांव-गांव, वार्ड-वार्ड और बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क बनाना पड़ता है। UKD के कई पदाधिकारी सोशल मीडिया पर तो 2027 में सत्ता परिवर्तन के दावे करते नजर आते हैं, लेकिन जनता के बीच उनकी मौजूदगी बेहद सीमित है।
यदि UKD वास्तव में 2027 विधानसभा चुनाव में चुनौती पेश करना चाहती है तो उसे सबसे पहले संगठन में अनुशासन लाना होगा। प्रत्येक पदाधिकारी की जमीनी ताकत का आकलन करना होगा और केवल पद बांटने की राजनीति छोड़कर कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करनी होगी। शक्ति प्रदर्शन सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि जनता के बीच दिखाई देना चाहिए।
Ukd के कुछ चेहरे ऐसे है जिनकी जनता में मांग है जिन्हे पूरा राज्य जानता है लेकिन पदाधिकारियों की गुटबाजी और कुछ की चापलूसी के कारण केंद्रीय अध्यक्ष भी उन्हें दरकिनार किये हुए है
नरेंद्रनगर निकाय चुनाव के नतीजे साफ संकेत दे रहे हैं कि UKD के लिए 2027 की राह आसान नहीं है। 50 वोट का आंकड़ा यह बता रहा है कि पार्टी को अभी जनविश्वास दोबारा हासिल करने के लिए लंबा संघर्ष करना होगा। सवाल यही है कि क्या UKD इस चेतावनी को गंभीरता से लेगी, या फिर 2027 के सपने केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित रह जाएंगे?




