एनजीटी नियमों को ताक पर रख संचालित अभ्युदय स्टोन क्रेशर की जांच को लेकर सुनला के ग्राम प्रधान ने खोला मोर्चा।
सुभाष पिमोली थराली
।
सुनला में स्थापित अभ्युदय स्टोन क्रेशर के संचालन में संचालक द्वारा चलाई जा रही मनमानी और पर्यावरणीय मानकों को ताक पर रखकर स्टोन क्रेशर के संचालन के खिलाफ मुखर होते हुए ग्राम प्रधान सुनला भगवती प्रसाद जोशी ने बीते मई माह में उपजिलाधिकारी थराली को ज्ञापन सौंपते हुए जांच की मांग की थी, जिस पर अब उपजिलाधिकारी थराली यशवीर सिंह रावत ने जिला खनन अधिकारी को पत्र भेजते हुए जांच की संस्तुति दी हैं।
शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान भगवती प्रसाद जोशी ने अभ्युदय स्टोन क्रेशर पर खनिज अधिनियम 1957 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के उलंघन का आरोप लगाया हैं, साथ ही शिकायकर्ता ने स्पष्ट किया है कि उक्त स्टोन क्रेशर संचालक द्वारा क्रेशर की स्थापना के समय ग्रामसभा द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं, साथ ही उक्त स्टोन क्रेशर संचालक द्वारा दूषित पानी को सीधे पिण्डर नदी में छोड़ने के साथ ही धूल का उत्सर्जन भी संचालन के दौरान किया जा रहा हैं।
पत्र में ग्राम प्रधान का कहना हैं कि विगत लगभग 10 वर्षों से सुनला में संचालित यह क्रेशर है परंतु जिन ग्रामवासियों की भूमि पर यह क्रेशर स्थापित है उनकी आय में आजतक कोई वृद्धि नहीं हुई है, अतः भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्स्थापना में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 30 एवं 31 के अंतर्गत पुनर्वास एवं लाभ वितरण संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन हैं।
पत्र में ग्राम प्रधान का कहना हैं कि सुरक्षा व्यवस्था की घोर लापरवाही के चलते एक युवक की मृत्यु हो गई थी, साथ ही क्रेशर के मुख्य द्वार पर एक घंटा भी कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं रहता हैं जो व्यक्ति तैनात हैं वह भी बिना वर्दी के उपस्थित हैं, जबकि फैक्ट्री अधिनियम 1948 एवं खनन सुरक्षा नियमों के अंतर्गत यह अनिवार्य है, इसी लापरवाही के परिणाम स्वरुप उक्त प्रवेश द्वार के समक्ष एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी, इस घटना से पूर्व यहां कोई दर्पण (कन्वैक्स मिरर) की व्यवस्था भी नहीं थी, जो मोटर वाहन अधिनियम 1988 के सुरक्षा मानकों के विपरीत है, क्रेशर कार्य से उत्पन्न धूल के कारण क्षेत्र के बच्चों, वृद्ध एवं ग्रामवासियों में श्वसन संबंधी गंभीर रोग उत्पन्न हो रहे हैं।
ग्राम प्रधान का पत्र में कहना हैं कि चिंताजनक विषय यह है की नदी तट पर बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करने वाले प्राकृतिक अवरोधों का भी खनन कर लिया गया है, जिससे संपूर्ण ग्राम एवं क्षेत्रवासियों का भविष्य आपदाओं की प्रति अत्यंत संवेदनशील हो गया है, यह आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 तथा पर्यावरण प्रभाव आंकलन अधिसूचना 2006 के प्रावधानों के विरुद्ध हैं।
ग्राम प्रधान सुनला ने अभ्युदय स्टोन क्रेशर की श्रम विभाग ,खनन विभाग और पर्यावरण द्वारा संयुक्त स्थलीय जांच की मांग की है, जिस पर अपनी संस्तुति देते हुए उपजिलाधिकारी थराली यशवीर सिंह रावत ने जिला खनन अधिकारी को पत्र भेज दिया हैं।




