नशा मुक्त भारत नशा मुक्त उत्तराखंड के संकल्प को लेकर
जैन धर्मशाला के निर्मल पंडित स्मृति सभागार जुटे उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों की प्रतिनिधि।
देहरादून। राष्ट्रीय शराबबंदी संयुक्त मोर्चा और नशा मुक्ति जन जागरण संयुक्त अभियान समिति, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में नशे के खिलाफ दो दिवसीय अंतरराज्यीय सम्मेलन की शुरुआत दिगंबर धर्मशाला में हुई। पहले दिन के दो सत्रों देशभर से आये कई सामाजिक संगठनों ने नशे के खिलाफ प्रतिकार के लिए ठोस आंदोलन चलाने की जरूरत पर जोर दिया। सभी वक्ताओं ने नशे से उपजने वाली सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक अपसंस्कृति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीति और व्यवस्था के रास्ते आने वाला नशा लोकतंत्र को खोखला करने वाला है।
नशे के खिलाफ दो दिवसीय अंतरराज्यीय सम्मेलन के पहले दिन निर्मल पंडित सभागार में पहले सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय शराबबंदी संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुल्तान सिंह ने की। इस सत्र मे नशे की प्रवृत्ति और उसमें सरकार की नीतियों पर अलग-अलग दृष्टियों से बातचीत हुई। वक्ताओं ने शशे के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से अपनी बात रखी। उत्तराखंड में नशे के ऐतिहासिक आंदोलनों और आज सरकार प्रायोजित शराब की जनविरोधी नीति पर भी विस्तार से विमर्श हुआ। देशभर से आये प्रतिनिधियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे शराब विरोधी आंदोलनों की चर्चा की। उन्होंने आंदोलनों के अपने अनुभव और सरकार के रवैये को सबके सामने रखा। इससे यह बात तो साफ हो गई कि देश में नशे को लेकर विशेषकर शराब नीति को लेकर सभी सरकारों का रवैया एक जैसा है। सरकारें शराब को ही राजस्व का सबसे बड़ा जरिया मानती है इसका परिणाम यह हुआ कि शराब सत्ता में जाने का रास्ता बन गया है। इस सत्र में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी, डीके जोशी, बीपी नौटियाल, विनोद नौटियाल, . सुल्तान सिंह, पुष्कर दुर्गापाल, विनोद नौटियाल, राकेश ध्यानी आदि ने अपनी बात रखी। इससे पहले कार्यक्रम के संयोजक प्रभात ध्यानी ने सभी का स्वागत किया और मंच का संचालन जीवन चंद्र उप्रेती ने किया।
पहले दिन के दूसरे सत्र में उत्तराखंड में नशे की प्रवृत्ति और सरकार के सरंक्षण में पनप रहे नशे के प्रतिकार पर विमर्श किया गया। इस सत्र के मुख्य वक्ता पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा थे। इस सत्र में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में शराब और नशे के प्रलन के लिए सरकार जिम्मेदार है। वक्ताओं ने कहा कि शराब एक षड्यंत्र है। यह षडयंत्र राजनीति के रास्ते आया है। सम्मेलन पर इस बात पर चिंता व्यक्त की कि पंचायत चुनावों से लोकसभा के चुनावों में जिस तरह नशे का इस्तेमाल किया जा रहा है उसने गांव तक राजनीतिक अपसंस्कृति को पहुंचाया है। सम्मेलन में इस बात पर एकजुटता प्रदर्शित की गई कि राज्य में नशे के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन चलाया जाये, इसके लिए पुराने आंदोलन के साथियों और संगठनों से बातचीत की जायेगी। इस अवसर पर टिंचरी माई, सर्वोदय, विनयलक्ष्मी सुमन से लेकर निर्मल पंडित को याद किया गया, जिन्होंने नशे के खिलाफ आंदोलन में अपनी शहादत दी। वक्ताओं ने कहा कि शराब के खिलाफ चलने वाली मुहिम के आलोक में हमें राज्य की सभी समस्याओं को देखने की जरूरत है। सरकार की शराब नीति राज्य की तमाम नीतियों को प्रभावित करती है। राज्य में शराब के अलावा ड्रग्स और अन्य नशों के बढते प्रकोप से बिगडती सामाजिक संरचना को भारी नुक़सान पहुंचा है।
दूसरे सत्र को प्रदीप टम्टा, कमला पंत, पीसी तिवारी, धीरेंद्र प्रताप, तारादत्त घिल्डियाल, अवधेश शर्मा, गिरीश डालाकोटी आदि ने संबोधित किया। मंच का संचालन चारु तिवारी ने किया।
इस अवसर पर एस. एस. पांग्ती बलदेव राज सूद, सिंह, नंद नंदन पांडे, लोकेश नवानी, जे. पी. बड़ौनी, इन्द्रेश मैखुरी, आसिफ, सुखदेव, संजय दास, अवधेश राम, सर्वेश कुमार गौड़, जितेन्द्र, गीता चौधरी, लालमणि, सुरेन्द्र पंवार, हरिओम गौतम, रामदास, धर्मेन्द्र दीक्षित, सी पी शर्मा, ललित जोशी, योगेश सिंह, बलदेव राज सूद, अरविंद देश पांडे , दिवाकर जोशी, डा. राजकुमार, ए. पी. उनियाल, ज्ञानवीर, सुरेश डंगवाल, गिरीज सिंह धाकरे, मुन्ना लाता, ललित जोशी, योगेश सिंह, बराजकुमार त्यागी, एस. के. गुप्ता, एस. बलौंदी, सुमन मेहरा, दिनेश उपाध्याय, जी. एस. बिष्ट, गौरव तिवारी, डा. मुकुल शर्मा, मेघा, संजय भारद्वाज, गिरीश डालाकोटी, रिशी दुर्गापाल, साक्षी पोखरियाल , गीता चौधरी आदि उपस्थित थे।
कल सुबह दिगंबर धर्मशाला से गांधी पार्क तक नशे के खिलाफ एक जनजागरण रैली निकाली जाएगी और फिर विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श होगा। आगामी कार्यक्रमों और कार्यनीति की घोषणा की जाएगी।

