“हर घर जल” योजना पर कांग्रेस नेता कवींद्र इष्टवाल ने उठाए सवाल, पेयजल संकट और जंगल की आग ने बढ़ाई चिंता
-योजनाओं की विफलता और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग उठाई।
पौड़ी। उत्तराखंड में “हर घर जल” योजना को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। कांग्रेस प्रदेश सचिव कवींद्र इष्टवाल ने राज्य की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़े अंतर की ओर इशारा किया है।
इष्टवाल का कहना है कि सरकार ने हर घर तक पानी पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए। इसके तहत पाइपलाइन बिछाई गईं और पंपिंग योजनाएं भी तैयार की गईं, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। आज भी प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हालात तब और अधिक गंभीर हो जाते हैं, जब राज्य के कई हिस्सों में भीषण जंगल की आग लगी हुई है। ऐसे संकट के समय पानी की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है, लेकिन जिन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वे इस समय कारगर साबित नहीं हो रही हैं। कई स्थानों पर पाइपलाइन तो मौजूद हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं पहुंच रहा, जबकि टंकियां बनने के बावजूद नियमित सप्लाई नहीं हो पा रही है।
कांग्रेस नेता ने इस पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि आम जनता के बीच यह चर्चा है कि इन योजनाओं में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। बाहरी ठेकेदारों को भारी भुगतान किया गया, लेकिन कार्य की गुणवत्ता और स्थायित्व पर ध्यान नहीं दिया गया। साथ ही स्थानीय जरूरतों और संसाधनों को भी नजरअंदाज किया गया।
इष्टवाल ने सरकार से मांग की है कि वह केवल आंकड़ों और दावों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक स्थिति का सामना करे। उन्होंने योजनाओं की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जमीनी स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो “हर घर जल” योजना महज एक नारा बनकर रह जाएगी।




