“घर-घर पहुंच रहा कुलदीप, बढ़ता जनसमर्थन… क्या दिलीप रावत की मुश्किलें बढ़ेंगी?”
लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है—कुलदीप रावत। गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर लोगों से मिल रहे कुलदीप को हर जगह समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही माहौल रहा तो यह लहर कई बड़े नेताओं को अपनी जगह बदलने पर भी मजबूर कर सकती है।
हालांकि ऐसा नहीं है कि कुलदीप रावत अचानक चुनाव की वजह से ही लैंसडाउन में सक्रिय हुए हों। बीते कई वर्षों से वे लगातार क्षेत्र की जनता के बीच रहते आए हैं। सुख-दुख के हर मौके पर लोगों के साथ खड़े रहने की उनकी आदत ही उन्हें लोगों के दिलों के करीब ले आई है।
लोग बताते हैं कि जब किसी परिवार पर संकट आता है—चाहे अस्पताल का खर्च हो या किसी जरूरतमंद की मदद—तो कुलदीप बिना पूछे मदद के लिए आगे खड़े नजर आते हैं। सैकड़ों लोगों की मदद कराने के उदाहरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
कहा जाता है कि सुख के समय तो हर कोई साथ देता है, लेकिन असली पहचान तब होती है जब कोई व्यक्ति मुसीबत में हो। ऐसे समय में कुलदीप का साथ कई लोगों ने महसूस किया है।
कुलदीप रावत के करीबियों का कहना है कि उनमें पहाड़ के लिए कुछ नया करने का जुनून है। पहाड़ से हो रहे पलायन और स्थानीय समस्याओं को लेकर वह लगातार लोगों के बीच संवाद कर रहे हैं।
सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार कुलदीप रावत अब लैंसडाउन विधानसभा के दूर-दराज गांवों तक पहुंच चुके हैं और बताया जा रहा है कि UKD से उनके संभावित उम्मीदवार होने की चर्चा भी तेज हो गई है।
खास बात यह भी है कि कुलदीप का व्यवहार ऐसा है कि वह युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों—सभी के साथ सहजता से जुड़ जाते हैं, जो उन्हें एक अलग पहचान देता है।




