✍️ हल्दुचौड़।
लाल बहादुर शास्त्री राजकीय महाविद्यालय, हल्दुचौड़ में स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाओं के संचालन की वर्षों पुरानी मांग अब एक गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है। ग्रामीण क्षेत्र के इस प्रमुख महाविद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं लंबे समय से एम.ए. योगा सहित अन्य विषयों में स्नातकोत्तर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल न होने से छात्रों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
इसी क्रम में आज छात्र संघ के कोषाध्यक्ष कमल चंद्र पांडे, उपाध्यक्ष संजना पांडे एवं छात्र नेता सुमित सिंह कार्की के नेतृत्व में महाविद्यालय के प्राचार्य को विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि एक सप्ताह के भीतर स्नातकोत्तर कक्षाओं का संचालन प्रारम्भ नहीं किया गया, तो छात्र-छात्राएं आमरण अनशन जैसे कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
छात्रों का कहना है कि यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार उठाई जा रही है। हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाती। इस कारण अब यह समस्या केवल शैक्षणिक न रहकर सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले चुकी है।
महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन स्नातकोत्तर कक्षाएं न होने के कारण उन्हें हल्द्वानी, नैनीताल जैसे शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है—जिसमें किराया, भोजन, परिवहन एवं अन्य खर्च शामिल हैं। ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च वहन करना संभव नहीं होता, जिसके चलते अनेक छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।
विशेष रूप से छात्राओं के सामने यह समस्या और भी गंभीर है। दूरी, सुरक्षा एवं सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई छात्राएं स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पातीं, जिससे उनका शैक्षणिक और कैरियर विकास बाधित हो रहा है। स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा न होना, क्षेत्र की बेटियों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनता जा रहा है।
छात्र संघ कोषाध्यक्ष कमल चंद्र पांडे ने कहा कि “वर्षों से चली आ रही इस मांग की लगातार अनदेखी की जा रही है, जो अब असहनीय हो चुकी है। यदि महाविद्यालय में पीजी कक्षाएं शुरू नहीं की गईं, तो छात्र उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।”
छात्र नेता सुमित सिंह कार्की ने कहा कि “यह केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों का प्रश्न है। सरकार और प्रशासन को ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ इस तरह का अन्याय नहीं करना चाहिए।”
वहीं छात्र संघ उपाध्यक्ष संजना पांडे ने कहा कि “महाविद्यालय में ही पीजी कक्षाएं शुरू होने से न केवल छात्राओं को राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा का स्तर भी सुधरेगा। वर्तमान स्थिति में सबसे अधिक नुकसान बेटियों को उठाना पड़ रहा है।”
छात्र संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इस बार भी मांगों को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल एक सप्ताह की समयसीमा दी गई है, जिसके बाद महाविद्यालय परिसर में आमरण अनशन सहित अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किए जाएंगे।
इस दौरान कमल चंद्र पांडे, सुमित सिंह कार्की, मनीष शर्मा, पूर्व छात्र संघ सचिव खजान चंद्र आर्य, संजना पांडे, रोहित नेगी, गोविन्द कुमार, बादल जीना, आयुष, ऋषभ, सागर, भावेश, कुनाल एवं कृष्णा भाकुनी सहित अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर एवं वर्षों पुरानी समस्या पर कितनी तत्परता से कार्यवाही करता है, या फिर छात्रों को अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।




