✍️ वाचस्पति रयाल, नरेंद्रनगर।
समुद्र तल से 6,300 फिट की ऊंचाई वाले नरेंद्रनगर के ऊंचे शैल शिखर पर विराजमान मां कुंजापुरी शक्तिपीठ में प्रथम नवरात्र से ही मां के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, मां के दर्शनों के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। पौराणिक ग्रंथों की मान्यता है कि दामाद भगवान शंकर को दक्ष प्रजापति द्वारा महायज्ञ में आमंत्रित ना किए जाने पर, माता सती इस अपमान को सहन नहीं कर सकी और उन्होंने यज्ञ के महाकुंड में अपनी आहुति दे दी,
भगवान शंकर को जैसे ही यह खबर लगी वे पर्वतों को लांघते हुए यज्ञ स्थल पर पहुंचे, 
सती का शरीर कंधे पर उठाया, शंकर भगवान के क्रोध को देख ब्रह्मा जी ने सती के शरीर को सुदर्शन चक्र से कई भागों में काट डाला,
बताते हैं कि मां सती का कुंज अर्थात हृदय का भाग नरेंद्र नगर के उच्च शैल शिखर पर गिरा जहां पर कुंजापुरी सिद्ध पीठ की स्थापना हुई।
बताते हैं कि मां का हृदय का भाग अत्यंत दयालु होता है, जो अपने श्रद्धालुओं पर दया की नेमत बरसाती है। और जो श्रद्धालु सच्चे मन से मां के दरबार में मन्नतें मांगने जाता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है, 
कई श्रद्धालुओं का कहना है कि मां के दरबार में आने से उनकी मनोकामनाएं पूरी हुई हैं, जिस वजह से वे कई बार मां के दर्शनों के लिए कुंजापुरी मंदिर पहुंचते हैं, उनका कहना है कि यह मां कुंजापुरी की ही कृपा है कि उनकी अंतरात्मा उन्हें मां के दर्शनों के लिए प्रेरित करती है।




