उत्तराखंड में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर UKD का प्रहार
अपराध, माफिया और पुलिस की कार्यशैली पर उठे तीखे सवाल
आज उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकारी अध्यक्ष जयप्रकाश उपाध्याय के नेतृत्व में पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर एक तीखा ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रदेश में बढ़ते अपराध, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, चोरी-लूट जैसे संगठित अपराधों और आमजन की असुरक्षा पर गहरी चिंता जताई गई।
“अपराध बेलगाम, जनता असुरक्षित”
UKD ने मांग की कि प्रदेश में बढ़ते अपराधों पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण किया जाए। खासतौर पर महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों पर कठोर और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दल ने साफ कहा कि अपराधियों के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि पुलिस वैज्ञानिक आधार पर साक्ष्य संकलन नहीं कर पा रही, जिससे अदालतों में अपराधी बच निकलते हैं।
नशा माफिया और बाहरी गुंडों पर वार की मांग
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बाहरी प्रदेशों के माफिया और गुंडों ने उत्तराखंड को शरणस्थली बना लिया है। नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई, माफियाओं की संपत्ति जब्ती और सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई।
साथ ही कई मामलों में पुलिस की कथित मिलीभगत पर भी सवाल उठाए गए और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।
प्रभावी हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम की मांग
UKD ने जनता की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के लिए प्रभावी हेल्पलाइन और सशक्त नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का सुझाव दिया। साथ ही पुलिस अधिकारियों की संपत्ति सार्वजनिक करने की मांग कर पारदर्शिता पर जोर दिया गया।
धार्मिक राजनीति पर रासुका की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि जाति-धर्म आधारित राजनीति के कारण पुलिस का मूल कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे तत्वों पर रासुका के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई।
ज्ञापन देने वालों में शामिल रहे महानगर अध्यक्ष प्रवीण रमोला, केंद्रीय महामंत्री किरन रावत, संगठन मंत्री प्रकाश भट्ट, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष संतोष भंडारी, वीर सिंह पवार, भरत सिंह राणा, रश्मि श्रेष्ठ और संगीता बहुगुणा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सवाल बड़ा है — क्या अपराध और माफिया पर लगाम कस पाएगा तंत्र, या यूं ही जनता डर के साये में जीती रहेगी?




