एक नंबर, दो डंपर! NH-534 पर खुलेआम फर्जीवाड़ा, प्रशासन की नींद टूटी शिकायत के बाद
सतपुली।
राष्ट्रीय राजमार्ग 534 पर सतपुली–गुमखाल मार्ग में चल रहे सड़क निर्माण कार्य में नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ती दिखीं। निर्माणदायी संस्था शिवालिक इंफ्रा के एक ही नंबर प्लेट के दो डंपर सड़कों पर फर्राटा भरते पाए गए—और हैरानी यह कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे चलता रहा।
स्थानीय निवासी इंद्रजीत असवाल ने शनिवार को एक ही नंबर के दो डंपर देखे और तत्काल उपजिलाधिकारी सतपुली रेखा आर्य को सूचना दी। एसडीएम के निर्देश पर पुलिस को वाहन पकड़ने को कहा गया, लेकिन एक दिन तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। सवाल यह है कि आखिर क्यों?
रविवार को जब एक डंपर सतपुली में दोबारा दिखा, तो शिकायतकर्ता ने स्वयं थाने के एसआई दिनेश कुमार को मौके पर वाहन दिखाया। जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—डंपर चालक के पास न तो कोई वैध कागजात थे और न ही वाहन से जुड़े दस्तावेज। इसके बावजूद पहले दिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं तो और क्या?
मामले की जानकारी थानाध्यक्ष पंकज कुमार को भी दी गई। दबाव के बाद आखिरकार एक डंपर को जब्त कर तहसील परिसर में खड़ा किया गया, जबकि दूसरा डंपर अब भी फरार है।
उपजिलाधिकारी रेखा आर्य ने बताया कि एक डंपर पुलिस हिरासत में लिया गया है और दूसरे की तलाश जारी है।
बड़े सवाल
एक ही नंबर के दो डंपर सड़क पर कैसे दौड़ते रहे?
निर्माण कार्य में लगे वाहनों की जांच किसकी जिम्मेदारी थी?
शिकायत के बावजूद पुलिस ने एक दिन तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
क्या बिना कागजात वाहन चलाना ठेकेदार–प्रशासन की मिलीभगत का संकेत है?
यह मामला सिर्फ वाहन फर्जीवाड़े का नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और ठेकेदारों की मनमानी का आईना है। अगर स्थानीय नागरिक आवाज़ न उठाते, तो क्या यह खेल यूँ ही चलता रहता?
अब देखना यह है कि दूसरे डंपर पर कब शिकंजा कसता है—या मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा।

