वरिष्ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की कलम का वार
रेखा-साहू दोनों की संपत्तियों की जांच हो
– टेंडर, ट्रांसर्फर पोस्टिंग की फाइल पर भी साहू का कब्जा
– आंगनबाड़ी वर्करों को भी नहीं छोड़ा, क्रिएटिव आउटसोर्स एजेंसी किसकी?
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधर साहू ने विगत सात-आठ साल में क्या अथाह दौलत कमा ली है। यह सवाल आम जनता के बीच है। यदि साहू के आरोपों को आधार माने तो रेखा आर्य की संपत्ति 210 करोड़ है। जबकि यदि उनका वेतन-भत्ता सब कुछ लगाया जाएं तो पांच साल में 4-5 करोड़ ही हो सकता है। 10 साल में 10 करोड़ लगा लो। लेकिन 210 करोड का अर्थ समझ सकते हो कि सीधे-सीधे लूटपाट का साम्राज्य बना हे। यह कमाई न केवल खनन टेंडर, बल्कि ट्रांर्सफर-पोस्टिंग से भी हुई होगी।
सूत्रों का कहना है कि समाज कल्याण, महिला सशक्तीकरण, खेल व अन्य विभागों में एक आउटसोर्स एजेंसी है क्रिएटिव। इसके माध्यम से विभागों में कर्मचारी रखे जाते हैं। आरोप है कि यह एजेंसी साहू की है। विभाग रेखा आर्य के पास हैं। 15 हजार की नौकरी में 12 की बजाए 11 महीने का ही वेतन दिया जाता है। इसमें से भी जीएसटी के नाम पर कर्मचारी से कमीशन वसूल लिया जाता है। आंगनबाड़ी वर्कर से भी काम के लिए मोटी रकम वसूली जाती है।
जानकारी के मुताबिक ट्रांसर्फर पोस्टिंग सीधे तौर पर साहू की दखल रहती है। यानी रेखा-साहू दोनों की मिलीभगत से हर काम हो रहा था। रेखा आर्य ने तब कभी कोई आवाज नहीं उठाई। चुपचाप सब देखती रही। आंगनबाड़ी वर्कर से एक लाख से ढाई लाख की वसूली तो हद ही है, दया भी नहीं आती, इन नामुराद नेताओं को।
भले ही रेखा आर्य कह रही हो कि साहू ने जो भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, वो निराधार हैं। जांच के लिए तैयार है। लेकिन वो जानती है कि जांच करेगा कौन? सब तो हमाम में नंगे हैं। एसआईटी टास्क पर ही काम करती है। यानी रेखा ने जो एफआईआर की है, उस पर ही काम करेगी। यदि रेखा-साहू का सच जानना है तो इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। रेखा और साहू की संपत्तियों की जांच हो तो सच जनता के सामने आएगा। वरना जांच-जांच के खेल में तो लोकतंत्र 79 साल का बूढ़ा हो गया।




