13 करोड़ का ‘भूतिया महल’, इलाज के नाम पर सिर्फ एक फार्मासिस्ट, UKD नेता ने उठाये सवाल
डाकपत्थर। पछवादून और डाकपत्थर की जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं का सपना दिखाकर सरकार ने 13 करोड़ रुपये की लागत से चार मंजिला अस्पताल की इमारत तो खड़ी कर दी, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। वर्ष 2024 से तैयार खड़ी इस आलीशान इमारत में इलाज के लिए मरीज आज भी डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं।
आरोप है कि पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी फिलहाल एक अकेले फार्मासिस्ट के भरोसे छोड़ दी गई है। सवाल यह है कि क्या एक फार्मासिस्ट ही डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा स्टाफ की भूमिका निभाएगा?
उक्रांद नेता अरविंद तोमर, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य, का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर 13 करोड़ रुपये खर्च कर भवन तो बना दिया गया, लेकिन डॉक्टर नहीं दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब डॉक्टर और स्टाफ ही उपलब्ध नहीं कराना था तो जनता के करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल भवन बनाने का औचित्य क्या था?
तोमर के मुताबिक इस मुद्दे को लेकर दो बार आवाज उठाई जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अस्पताल में डॉक्टरों और आवश्यक चिकित्सा स्टाफ की तैनाती नहीं होती, उक्रांद का आंदोलन और घेराव जारी रहेगा।
13 करोड़ की इमारत खड़ी है, लेकिन मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था कब खड़ी होगी? यही सवाल अब पछवादून की जनता सरकार से पूछ रही है।




