मरी बकरी का मांस खाने से 25 से अधिक लोग बीमार, बच्चों और महिलाओं में उल्टी-दस्त की शिकायत
,सिरोला गांव में मचा हड़कंप, कई मरीज बेस अस्पताल श्रीकोट में भर्ती
कीर्तिनगर/श्रीनगर। कीर्तिनगर ब्लॉक के मलेथा के समीप स्थित सिरोला गांव में मरी हुई बकरी का मांस खाने के बाद दो दर्जन से अधिक लोगों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। अचानक एक साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होने से गांव में हड़कंप मच गया। बीमार लोगों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। कई मरीजों का उपचार बेस अस्पताल श्रीकोट में चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, गांव में एक बकरी की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि इसके बाद ग्रामीणों ने बकरी का मांस पकाकर खा लिया। मांस खाने के कुछ समय बाद ही कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। ग्रामीणों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें सामने आईं। वहीं, कई बच्चों में डायरिया के लक्षण पाए गए। इसके बाद परिजन बीमार लोगों को उपचार के लिए स्थानीय अस्पतालों के साथ ही कीर्तिनगर और श्रीनगर लेकर पहुंचे।
कई मरीज बेस अस्पताल में भर्ती
हालत बिगड़ने पर कुछ मरीजों को बेस अस्पताल श्रीकोट लाया गया, जहां उनका चिकित्सकीय निगरानी में उपचार किया जा रहा है। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी मामले पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर चिंता बनी हुई है।
मरे या संदिग्ध रूप से बीमार पशु का मांस न खाएं : डॉ. अजय गोस्वामी
चिकित्सक डॉ. अजय गोस्वामी ने लोगों को सलाह दी है कि किसी पशु की बीमारी अथवा संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर उसके मांस का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। ऐसे मांस में हानिकारक बैक्टीरिया अथवा अन्य संक्रमणकारी तत्व मौजूद हो सकते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। केवल पकाने से ऐसे मांस के सेवन का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे मांस से दूर रखने की सलाह दी है। मांस खाने के बाद यदि उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार, अत्यधिक कमजोरी या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
बच्चों में डिहाइड्रेशन का खतरा:
चिकित्सकों के अनुसार लगातार उल्टी-दस्त होने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। ऐसे में मरीज को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ओआरएस और पर्याप्त तरल पदार्थ देना जरूरी है। खासकर छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।




