✍️ मनमोहन भट्ट,सिलक्यारा/उत्तरकाशी।
यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन देश की सबसे लंबी 4.531 किलोमीटर सिलक्यारा-पोलगांव सड़क सुरंग परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रहा है। निर्माण एजेंसी के अनुसार परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष 20 प्रतिशत कार्य में सुरंग की फिनिशिंग, डबल लेन के लिए मध्य दीवार, लाइनिंग, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कार्य शामिल हैं।
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सुरंग के एक हिस्से में लगभग 2 किलोमीटर तक तथा दूसरे हिस्से में 1500 मीटर तक सबग्रेड और जीएसबी का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं करीब 900 मीटर लाइनिंग और 1600 मीटर मध्य दीवार का निर्माण अभी बाकी है। सुरंग में लाइटिंग, पावर सप्लाई और अन्य सुरक्षा उपकरणों का कार्य भी किया जाना है।
परियोजना प्रबंधन के अनुसार सुरंग में इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल कार्यों पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पहली टीम साइट पर पहुंच चुकी है, जबकि अन्य टीमें भी जल्द कार्य शुरू करेंगी। सुरंग में आधुनिक फायर सप्रेशन सिस्टम समेत कई सुरक्षा व्यवस्थाएं स्थापित की जानी हैं।

*2019 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य*
चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत सिलक्यारा सुरंग का निर्माण वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। प्रारंभिक लक्ष्य चार वर्षों में निर्माण पूरा करने का था, लेकिन विभिन्न कारणों से समय-सीमा कई बार बढ़ाई गई। परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 1384 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।
वर्ष 2023 नवंबर में सुरंग के भीतर हुए हादसे में 41 श्रमिक फंस गए थे, जिन्हें 17 दिन चले देश के सबसे बड़े रेस्क्यू अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना के कारण निर्माण कार्य कई महीनों तक प्रभावित रहा । इस सुरंग का ब्रेक-थ्रू (आर-पार खुदाई) अप्रैल 2025 में पूरा हो गया था।
*मार्च 2027 का लक्ष्य*
निर्माण कंपनी का दावा है कि परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि वर्तमान प्रगति को देखते हुए तय समय में शेष कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान कोई बड़ी तकनीकी या भूगर्भीय समस्या नहीं आई तो लक्ष्य के अनुरूप कार्य पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। जबकि, आंतरिक निर्माण कार्यों और सुरक्षा को देखते हुए इसे यातायात के लिए पूरी तरह से तैयार होने में लगभग एक से डेढ़ वर्ष का समय और लगने का अनुमान है।
सुरंग के पूरा होने के बाद यमुनोत्री धाम की यात्रा 26 किलोमीटर की कम दूरी के साथ अधिक सुरक्षित, सुगम और तेज होगी तथा चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना को भी बड़ी मजबूती मिलेगी।




