सिस्टम की चुप्पी और कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों की मजबूत आवाज बना युवा अधिवक्ता विवेक कठैत, छेड़ी रुद्रप्रयाग के हक की निर्णायक लड़ाई
जनपद रुद्रप्रयाग में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण कार्यों से उपजी समस्याओं ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। इस संघर्ष के केंद्र में हैं युवा अधिवक्ता विवेक कठैत, जो सिस्टम की चुप्पी और कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों की एक मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं।
निर्णायक मोड़ पर संघर्ष
रेलवे लाइन के निकटवर्ती गाँवों, विशेषकर आसपास के क्षेत्रों में परियोजना के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। अधिवक्ता विवेक कठैत ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका संघर्ष मुख्य रूप से इन तीन गंभीर मुद्दों पर केंद्रित है:
* आधी रात की ब्लास्टिंग: अनुमति के विपरीत रात 10 बजे से तड़के 2 बजे तक होने वाले धमाकों ने ग्रामीणों का सुकून छीन लिया है।
* अवैध मूक डंपिंग: निर्माण मलबे को सीधे नदियों में फेंका जा रहा है, जिससे हिमालयी पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
* धूल और प्रदूषण: डस्ट कंट्रोल के अभाव में बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
विवेक कठैत द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए नोटिस के बाद सोशल मीडिया और जमीन पर उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक सजग नागरिक और कानूनविद के रूप में विवेक ने न केवल कानूनी लड़ाई छेड़ी है, बल्कि वे बेजुबान वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए एक सुरक्षित ‘ढाल’ बनकर खड़े हुए हैं।
अधिवक्ता विवेक कठैत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 72 घंटों के भीतर रात्रि ब्लास्टिंग पर रोक नहीं लगी और कंपनियों पर भारी जुर्माना नहीं लगाया गया, तो वे इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाएंगे। उन्होंने इसे “रुद्रप्रयाग के भविष्य और अस्तित्व की लड़ाई” करार दिया है।
क्षेत्र की जनता विवेक के इस साहसी कदम की सराहना करते हुए उनके “विजयी भव” के संकल्प के साथ खड़ी नजर आ रही है।




