आधा सत्र बीत गया, सरकारी स्कूलों के बच्चों को किताब तक नहीं!
‘निर्झरा भाग-2’ किताब का इंतजार करते रहे पहाड़ के बच्चे, मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद पता चला—किताब छपी ही नहीं!
उत्तराखंड के राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों में पढ़ने वाले गरीब और पर्वतीय क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अक्टूबर का महीना आ गया, लेकिन हिंदी विषय की निर्धारित ‘निर्झरा भाग-2’ पुस्तक अब तक विद्यार्थियों को उपलब्ध नहीं हो सकी।
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज के हिंदी प्रवक्ता अविनाश चंद्र ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई तो कथित तौर पर सामने आया कि पुस्तक एससीईआरटी से छपी ही नहीं है।
सवाल सीधा है—जब किताब पाठ्यक्रम में निर्धारित थी तो आधा सत्र बीतने तक उसकी छपाई और वितरण क्यों नहीं हुआ? सुदूर पहाड़ों से कई किलोमीटर पैदल चलकर सरकारी स्कूल पहुंचने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
गरीब के बच्चे हैं, इसलिए किताब भी देर से मिलेगी?
सरकार और शिक्षा विभाग को अब जवाब देना होगा कि इस लापरवाही की जवाबदेही किसकी है और बच्चों के हुए शैक्षणिक नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
Cobra News UK — सवाल जनता के, जवाब सरकार के।




