2013 की तबाही के 13 साल बाद भी अधूरी सुरक्षा दीवार, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
पीपल चौरी से श्रीकोट तक सुरक्षा दीवार का काम अधर में, कांग्रेस का आरोप सरकारें बदलीं, आश्वासन मिले, लेकिन जनता की सुरक्षा पर नहीं हुआ काम
श्रीनगर गढ़वाल। वर्ष 2013 की भीषण अलकनंदा बाढ़ की त्रासदी को 13 साल बीतने के बावजूद श्रीनगर में अलकनंदा नदी तट पर प्रस्तावित सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। अधूरी पड़ी सुरक्षा दीवार को लेकर कांग्रेस ने सरकार और शासन-प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नदी तट की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य वर्षों से लंबित है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और सरकार इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
कांग्रेस प्रदेश सचिव वीरेंद्र सिंह नेगी, कांग्रेस मीडिया प्रभारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता लाल सिंह नेगी तथा नगर निगम श्रीनगर के कमलेश्वर बागवान वार्ड के पार्षद सूरज नेगी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2013 में अलकनंदा नदी में आई भीषण बाढ़ से श्रीनगर के केशवराव मठ, एसएसबी क्षेत्र, भक्तियाना समेत कई तटवर्ती इलाकों में भारी तबाही हुई थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मौके पर पहुंचकर नदी तट की सुरक्षा के लिए सुरक्षा दीवार निर्माण की पहल की थी।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार पीपलचौरी से श्रीकोट तक सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य शुरू हुआ, लेकिन पीपलचौरी से केशवराव मठ के समीप तक ही निर्माण हो सका। इसके बाद आगे का निर्माण कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने के बजाय इसे अधर में छोड़ दिया गया।
लाल सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि सुरक्षा दीवार को लेकर स्थानीय जनता कई बार आंदोलन और धरना-प्रदर्शन कर चुकी है। श्रीनगर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले भी आंदोलन किया गया, लेकिन हर बार स्थानीय लोगों को आश्वासन ही मिला। उन्होंने कहा कि वर्षों बीत जाने के बावजूद अधूरी सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा नहीं कराया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अधूरी सुरक्षा दीवार के पीछे मिट्टी और बोल्डर का भरान भी कराया जाना जरूरी है, ताकि अलकनंदा नदी के तेज बहाव और कटाव से तटवर्ती इलाकों को सुरक्षा मिल सके। उनका कहना है कि बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थानीय लोगों में हमेशा चिंता बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद शासन-प्रशासन इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार विकास और सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन श्रीनगर में वर्ष 2013 की आपदा के बाद शुरू कराया गया महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि जब नदी तट की संवेदनशीलता और पूर्व में हुई तबाही की जानकारी है, तो फिर सुरक्षा दीवार निर्माण को पूरा कराने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।
सितंबर के अंतिम सप्ताह से आंदोलन की चेतावनी :
कांग्रेस नेताओं ने सरकार और शासन-प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि अलखनंदा नदी तट पर अधूरी सुरक्षा दीवार का निर्माण शीघ्र शुरू नहीं किया गया और उसके पीछे मिट्टी-बोल्डर का भरान नहीं कराया गया, तो स्थानीय जनता के साथ सितंबर के अंतिम सप्ताह से धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि श्रीनगर शहर और अलकनंदा नदी तट पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि बिना किसी और देरी के सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कराई जाए।




