✍️ भूपेंद्र रावत, उत्तरकाशी।
मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम एंव मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 कार्य-योजना की समीक्षा बैठक लेते हुये, मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह ने कृषि, उद्यान, शिक्षा, पशुपालन, उद्योग, उरेडा, डेरी-विकास, विद्युत, वन, पर्यटन, मत्स्य, ग्रामोत्थान (ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना) आदि विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुये कहा कि सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ते हुये, कार्य-योजना में ऐसे कार्यों को जोड़ जाए, जिनसे क्षेत्रवासियों को लाभ प्रदान हो सके
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगारपरक एवं प्रभावी प्रस्तावों को प्राथमिकता देते हुए योजना में सम्मिलित किया जाए, जिससे पलायन रोकने के प्रयासों को और मजबूती मिल सके।
उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में उक्त स्थान पर स्वरोजगार की जाने वाली योजनाओं को स्थापित करने से पूर्व वहाँ की जलवायु स्थिति का परीक्षण अनिवार्य रूप से कर लिया जाए l उन्होंने मुख्य कृषि अधिकारी को सोलर पम्पिंग, वाटर लिफ्टिंग जैसी योजनाओं को शत-प्रतिशत रूप क्रियान्वित करने के निर्देश दिये
वहीं मुख्य विकास अधिकारी ने आजीविका संवर्द्धन जैसे कार्यों को कार्य – योजना में प्राथमिकता के आधार पर सम्मिलित करने के निर्देश दिये।
उन्होंने पशुपालन के क्षेत्र में पोल्ट्री फार्म, बकरी पालन, गाय पालन आदि जन उपयोगी योजनाओं पर जोर देते हुये कहा कि हाइड्रो पोनिक यूनिटस, रोपवे निमार्ण, खेतों में ड्रोन द्वारा दवाई छिड़काव, खेल मैदान, सब्जी उत्पादन, मशरुम उत्पादन, आदि स्वरोजगार से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का ठोस प्लानिंग के तहत निष्पादन किया जाए।
तत्पश्चात उन्होंने वाइब्रेंट विलेज व 25 सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा करते हुये, 25 सूत्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व में कराये गये कार्यों की प्रगति का वार्षिक कैलेण्डर 30 अप्रैल 2026 तक आवश्यक रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिये
बैठक में परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अजय सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी एसएस वर्मा, मुख्य उद्यान अधिकारी रजनीश कुमार, सहायक निदेशक डेरी-विकास पीयूष, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी हरि सिंह बिष्ट, परियोजना प्रबंधक रीप कपिल उपाध्याय सहित विभिन्न सम्बंधित अधिकारी वर्चुअली जुड़े रहे।




