10 साल में रेखा आर्य की घोषित संपत्ति 505% बढ़ी! ₹4.16 करोड़ से ₹25.20 करोड़ तक पहुंचा आंकड़ा, जांच की मांग से गरमाई उत्तराखंड की सियासत
2017 से 2022 के बीच ही करीब ₹12.42 करोड़ की बढ़ोतरी | हरक सिंह रावत ने उठाए आय के स्रोतों पर सवाल | चुनावी हलफनामों के आंकड़ों की पारदर्शिता पर बहस
देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की घोषित संपत्ति को लेकर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। चुनावी हलफनामों में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2012 में उनकी घोषित संपत्ति करीब ₹4.16 करोड़ थी, जो 2022 के विधानसभा चुनाव तक बढ़कर करीब ₹25.20 करोड़ दर्ज हुई। यानी दस साल में घोषित संपत्ति में लगभग ₹21.04 करोड़ की बढ़ोतरी हुई, जो शुरुआती आंकड़े के मुकाबले करीब 505 प्रतिशत है। <Link url=”https://www.myneta.info/uttarakhand2022/candidate.php?candidate_id=273″ title=”चुनावी हलफनामों का तुलनात्मक विवरण देखें”/>।
संपत्ति के इन आंकड़ों के बीच कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। वहीं, अधिवक्ता विकेश नेगी ने चुनावी हलफनामों, घोषित आय और संपत्ति के विवरण का तुलनात्मक आकलन किए जाने की जरूरत पर जोर दिया है।
हालांकि, संपत्ति में बढ़ोतरी अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। इसके पीछे आय, कारोबार, निवेश, संपत्ति के मूल्य में बदलाव और अन्य वैध वित्तीय स्रोतों की भूमिका हो सकती है। मुख्य सवाल यह है कि घोषित संपत्ति और उसके स्रोतों का आकलन दस्तावेजों के आधार पर किस तरह किया जाता है।
चार चुनाव, संपत्ति के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) से संबद्ध मायनेटा के सार्वजनिक रिकॉर्ड में रेखा आर्य के चुनावी हलफनामों में घोषित संपत्ति के आंकड़े इस प्रकार दर्ज हैं। <Link url=”https://www.myneta.info/utt2012/candidate.php?candidate_id=761″ title=”2012 का हलफनामा”/> | <Link url=”https://www.myneta.info/uttarkhand2014bye/candidate.php?candidate_id=16″ title=”2014 का उपचुनाव”/> | <Link url=”https://www.myneta.info/uttarakhand2017/candidate.php?candidate_id=565″ title=”2017 का हलफनामा”/> | <Link url=”https://www.myneta.info/uttarakhand2022/candidate.php?candidate_id=273″ title=”2022 का हलफनामा”/>।
चुनाव वर्ष| घोषित संपत्ति
2012| ₹4.16 करोड़
2014 उपचुनाव| ₹6.72 करोड़
2017 विधानसभा चुनाव| ₹12.78 करोड़
2022 विधानसभा चुनाव| ₹25.20 करोड़
इन आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2022 के बीच घोषित संपत्ति में करीब ₹12.42 करोड़ की वृद्धि हुई। ADR की 2022 की रिपोर्ट में इस अवधि की वृद्धि लगभग 97 प्रतिशत दर्ज है। <Link url=”https://adrindia.org/sites/default/files/Analysis_of_Assets_Comparison_of_Re-Contesting_MLAs_in_the_Uttarakhand_Assembly_Election_2022_English.pdf” title=”ADR की संपत्ति तुलना रिपोर्ट पढ़ें”/>।
₹210 करोड़ की कथित संपत्ति का आरोप भी चर्चा में
रेखा आर्य की संपत्ति का मुद्दा ऐसे समय में उठा है, जब उनके पति गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो के जरिए उन पर करीब ₹210 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने भी इस मामले में जांच की मांग उठाई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी जरूरी है। <Link url=”https://indianexpress.com/article/india/assault-uttarakhand-minister-husband-corruption-rekha-arya-girdhari-lal-sahu-illegal-assets-10925222/” title=”मामले पर प्रकाशित रिपोर्ट पढ़ें”/>।
दूसरी ओर, रेखा आर्य ने अपने पति के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं। इस तरह यह मामला पारिवारिक विवाद, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े अलग-अलग पहलुओं के कारण चर्चा में है। इन सभी मामलों की जांच और निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
हरक सिंह रावत ने उठाई जांच की मांग
कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने नेताओं की संपत्ति और आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी का आकलन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने विभिन्न विभागों और योजनाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल किए।
यह हरक सिंह रावत के आरोप और राजनीतिक मांग हैं। किसी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों, आय के रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों का परीक्षण जरूरी है।
हलफनामों में संपत्ति का हिसाब कैसे देखा जाता है?
अधिवक्ता विकेश नेगी के उठाए मुद्दे के संदर्भ में संपत्ति का आकलन करते समय कुछ बिंदुओं पर ध्यान देना जरूरी है:
– घोषित कुल संपत्ति: चुनावी हलफनामे में दर्ज चल और अचल संपत्ति का कुल मूल्य।
– संपत्ति में बढ़ोतरी: दो चुनावों के बीच घोषित संपत्ति के मूल्य का अंतर।
– आय के स्रोत: कारोबार, कृषि, वेतन, निवेश और अन्य घोषित स्रोतों का विवरण।
– देनदारियां: ऋण और अन्य वित्तीय देनदारियों को संपत्ति के साथ अलग से देखना।
– दस्तावेजों का मिलान: हलफनामे के मूल विवरण, संबंधित संपत्ति रिकॉर्ड और उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों की जांच।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि संपत्ति का कुल मूल्य और शुद्ध संपत्ति एक ही चीज नहीं हैं। इसी तरह, हलफनामे में दर्ज संपत्ति की बढ़ोतरी और वास्तविक आय के बीच अंतर हो सकता है। इसलिए केवल दो कुल आंकड़ों की तुलना से किसी वित्तीय अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
हलफनामे के आंकड़ों में अंतर का दावा, मूल दस्तावेजों से पुष्टि जरूरी
कुछ रिपोर्टों में वर्ष 2022 के हलफनामे की कुल संपत्ति और मदवार आंकड़ों में अंतर होने का दावा किया गया है। लेकिन उपलब्ध मायनेटा रिकॉर्ड में घोषित कुल संपत्ति ₹25,20,18,003, चल संपत्ति ₹8,19,18,003 और अचल संपत्ति ₹17,01,00,000 दर्ज है। इन दोनों मदों का जोड़ घोषित कुल संपत्ति के बराबर है। इसलिए ₹71.90 लाख या अचल संपत्ति में ₹1 करोड़ के कथित अंतर को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रकाशित करने से पहले मूल हलफनामे की संबंधित प्रविष्टियों की दोबारा जांच आवश्यक है। <Link url=”https://www.myneta.info/uttarakhand2022/candidate.php?candidate_id=273″ title=”2022 के संपत्ति विवरण का स्रोत”/>।
मंत्री के जवाब और निष्पक्ष जांच पर टिकी नजरें
संपत्ति के आंकड़ों को लेकर उठे सवालों के बीच रेखा आर्य का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, संबंधित रिपोर्ट तैयार किए जाने तक उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हो सका था। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि चुनावी हलफनामों में दर्ज संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब क्या है? यदि कोई शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज होती है, तो संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जनता को आरोपों के बजाय प्रमाण, पारदर्शिता और जवाबदेही के आधार पर सच्चाई जानने का अधिकार है।




