बड़ी खबर : देहरादून के सिडकुल सेलाकुई में मजदूरों का फूटा गुस्सा, डिक्सन कंपनी पर शोषण के गंभीर आरोप
,हर माह लाखों रूपये का मार रही मजदूरों का :-देखें क्या है आरोप
देहरादून के सेलाकुई सिडकुल स्थित Dixon Technologies में मजदूरों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। वर्षों से शोषण का आरोप झेल रही कंपनी के खिलाफ कर्मचारियों ने हल्ला बोलते हुए श्रम विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मजदूरों का आरोप है कि कंपनी में 13 घंटे तक लगातार काम कराया जा रहा है और पूरे 30 दिन मजदूरी कराने के बाद भी कर्मचारियों को मात्र 15 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी में रोजाना एक अतिरिक्त “फालतू कार्य” कराया जाता है, जिसका भुगतान मजदूरों को नहीं दिया जाता।
बताया जा रहा है कि कंपनी में करीब 3500 मजदूर कार्यरत हैं। यदि मजदूरों के आरोप सही पाए जाते हैं तो हर माह लाखों रुपये का भुगतान रोके जाने का मामला सामने आ सकता है। कर्मचारियों का दावा है कि कंपनी हर महीने करीब 54 लाख रुपये का आर्थिक शोषण कर रही है।
सबसे गंभीर आरोप श्रम विभाग पर लगाए गए हैं। मजदूरों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत पहले भी श्रम विभाग को दी गई थी, लेकिन जांच करने के बजाय अधिकारियों ने मामले को दबाने का काम किया। अब मजदूर खुलकर पूछ रहे हैं कि आखिर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाला विभाग किसके हित में काम कर रहा है।
सेलाकुई सिडकुल में बढ़ते श्रमिक असंतोष ने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि शासन और श्रम विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करते हैं या फिर मजदूरों की आवाज एक बार फिर फाइलों में दबा दी जाएगी।
*क्या हो रहा है कंपनी में मजदूरों के आरोप*
1- बढ़ी हुई सेलरी नहीं मिली अप्रैल माह की, राज्य सरकार द्वारा अप्रैल माह से सेलरी बढाई गई थी 518 रूपये जो कि कंपनी द्वारा नहीं दी गई, यदि हिसाब लगाया जाय तो 35 सौ मजदूर 518 रूपये तो लगभग 1 एक करोड़ 81 लाख 3000 रूपये बैठता है जिसे कंपनी और ठेकेदार घटक लिए
2- 13 घंटे 30 दिन कार्य करवाया जा रहा है जिसकी सेलरी 15 हजार रूपये दी जा रही है जबकि यदि 13 घंटे 30 दिन कार्य हो तो लगभग 27 हजार सेलरी बैठती है
ऐसे में 3500 मजदूरों का 12000 काटा जा रहा है जो लगभग 42 करोड़ के लगभग बैठ रहा है
3- ओबर टाइम डबल नहीं मिल रहा है
4- महिलाओ को रात दस से 11 बजे तक जबरदस्ती रोका जा रहा है
5-टी टाइम और लंच टाइम के बदले एक घंटा फ्री कार्य करवाया जा है ऐसे में 3500 मजदूर 1 घंटा लगभग 54 लाख मंथली बैठ रहा है शायद
6- उत्तराखंड के मात्र 20% लोग यहां कार्य करते है जबकि सरकार का कहना है कि उत्तराखंड के 70% अनुवार्य है
5- 5 से 10 साल कार्य करने पर भी प्रमोशन नहीं जबकि तीन साल में प्रमोशन होना चाहिये
अब सोचिये कि कंपनी किस तरह से मजदूरों का हर माह करोड़ो रूपये बिना पानी के हजम कर रही है
मजदूरों के आरोप है कि श्रम विभाग का कमिश्नर सुनकर भी अनजान बना बैठा है जिससे लगता है कि उनके बच्चों कि स्कूल फीस ये कंपनी वाले ही भरते है




