उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन ने अब टकराव का रूप ले लिया है। एक ओर विभाग द्वारा धरना-प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका/मिनी कर्मचारी संगठन ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए साफ ऐलान कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक कामकाज ठप रखा जाएगा।
संगठन की प्रदेश अध्यक्ष ने जारी पत्र में बताया कि 14 मार्च 2026 को प्रदेश स्तरीय रैली के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम था, जिसमें मानदेय बढ़ोतरी, ₹300 की कटौती बंद करने, रिटायरमेंट पर ₹10 लाख देने और बायोमेट्रिक प्रणाली लागू न करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं। आरोप है कि इस दौरान प्रशासन ने कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें जबरन वाहनों में भरकर हटाया, जिससे प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया।
इसी के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने निर्णय लिया है कि वे केंद्रों पर केवल उपस्थिति दर्ज करेंगी, लेकिन पोषण ट्रैकर सहित अन्य कार्यों का बहिष्कार करेंगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लगाए जाएंगे और कोई भी कार्यकर्ता बीएलओ का कार्य भी नहीं करेगी।
पत्र में विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें मोबाइल फोन तो दिए गए, लेकिन रिचार्ज के लिए पर्याप्त धन नहीं मिलता। ₹83.33 प्रति माह में रिचार्ज संभव नहीं है। इसके अलावा ढुलान, ईंधन, यात्रा भत्ता और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कोई पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं दी जाती। केंद्रों पर भोजन तैयार करने और विभिन्न कार्यक्रमों में स्टॉल लगाने के लिए भी कार्यकर्ताओं को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।
संगठन ने यह भी मुद्दा उठाया कि अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आती हैं—जिनमें विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और बीपीएल महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में कम मानदेय में परिवार चलाना बेहद कठिन हो गया है।
इसके साथ ही सरकार द्वारा जिला स्तर पर समस्या समाधान बैठकों के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि पिछले कई महीनों में किसी भी जिले में प्रभावी बैठक नहीं हुई है।
संगठन ने विभाग द्वारा जारी कार्रवाई संबंधी पत्र को “धमकी भरा” बताते हुए उसकी कड़ी निंदा की है और दो टूक कहा है कि इस तरह के दबाव से आंदोलन खत्म नहीं होगा। कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे महिला सशक्तिकरण, बाल विकास और बीएलओ से जुड़े सभी कार्यों का बहिष्कार जारी रखेंगी।
(प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों—जिलाधिकारी, निर्वाचन अधिकारी, उपनिदेशक एवं जिला/परियोजना कार्यक्रम अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है)




