संस्कृत की पुस्तक मांगी तो शिक्षक को थमा दिया कारण बताओ नोटिस! रिखणीखाल में शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, शिक्षक ने पूछा—क्या संस्कृत की किताब मांगना सरकार की छवि धूमिल करना है?


पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ों में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का एक और मामला सामने आया है। कक्षा 12 की संस्कृत पुस्तक ‘निर्झरा भाग-2’ उपलब्ध कराने की मांग उठाने वाले हिंदी प्रवक्ता अविनाश चंद्र को ही शिक्षा विभाग ने कारण बताओ नोटिस थमा दिया।
प्रवक्ता अविनाश चंद्र के अनुसार, उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1905 पर पुस्तक उपलब्ध कराने की मांग दर्ज कराई थी, लेकिन अक्टूबर माह बीतने के बावजूद विद्यार्थियों को पुस्तक नहीं मिली। हैरानी की बात यह है कि पुस्तक उपलब्ध कराने के बजाय खंड शिक्षा अधिकारी रिखणीखाल ने उन पर पठन-पाठन में व्यवधान डालने, कार्यालयी व्यवस्था प्रभावित करने और राज्य सरकार की छवि धूमिल करने जैसे आरोप लगाते हुए नोटिस जारी कर दिया।
अविनाश चंद्र ने सवाल उठाया कि जब संस्कृत उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा है, तो संस्कृत की पुस्तक मांगना आखिर सरकार की छवि कैसे धूमिल कर सकता है?
अब बड़ा सवाल यह है कि विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय सवाल उठाने वाले शिक्षक को नोटिस क्यों दिया जा रहा है? क्या सरकारी शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों की जरूरतों पर आवाज उठाना भी अपराध बन गया है?
कोबरा न्यूज यूके का सवाल है—पहाड़ के बच्चों को किताब कब मिलेगी और शिक्षक के सवालों का जवाब कौन देगा?
अविनाश चंद्र, प्रवक्ता हिंदी कुनालीखाल, विकासखंड रिखणीखाल, लैंसडौन, पौड़ी गढ़वाल।

