✍️ मनमोहन भट्ट, उत्तरकाशी।
5 अगस्त 2025 को आई भीषण आपदा ने उत्तरकाशी के धराली, हर्षिल और भागीरथी घाटी को गहरे जख्म दिए थे। मलबे ने घरों, दुकानों, खेतों, बाग-बगीचों, पशुधन और आजीविका के साधनों को भारी नुकसान पहुंचाया था। लेकिन एक वर्ष बाद यही क्षेत्र पुनर्निर्माण और विकास की नई मिसाल बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित क्षेत्रों में तेज गति से कार्य किए। सरकार के अनुसार बीते एक वर्ष में विभिन्न विभागों के माध्यम से ₹16 करोड़ से अधिक के विकास एवं पुनर्वास कार्य कराए गए, जबकि प्रभावित परिवारों को ₹17 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इस प्रकार कुल ₹33 करोड़ से अधिक की राशि राहत, पुनर्वास और विकास कार्यों पर खर्च की गई।
सरकार ने केवल आधारभूत ढांचे को ही नहीं सुधारा, बल्कि प्रभावित परिवारों की आजीविका बहाल करने पर भी विशेष ध्यान दिया। पशुपालन, कृषि, उद्यान, सिंचाई, बिजली, पेयजल, सड़क, पर्यटन और खाद्य आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर कार्य किए गए। किसानों को फसल और पौध वितरण, बागों की क्षति पर प्रतिपूर्ति तथा बकरी एवं भेड़ पालन को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास किया गया।
क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, विद्युत और पेयजल व्यवस्था की बहाली तथा नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा कार्यों को भी प्राथमिकता दी गई, ताकि भविष्य में संभावित आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके। वहीं पर्यटन गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों से स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी नई गति मिलने लगी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धराली की आपदा केवल पुनर्निर्माण की चुनौती नहीं थी, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन और भविष्य को फिर से संवारने की जिम्मेदारी भी थी। उन्होंने कहा कि सरकार पहले दिन से प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और भागीरथी घाटी को पहले से अधिक सुरक्षित, सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्य लगातार जारी रहेंगे।
एक वर्ष पहले जिस धराली की तस्वीरें तबाही की कहानी बयां कर रही थीं, आज वहीं क्षेत्र पुनर्निर्माण, विकास और लोगों के अदम्य साहस की मिसाल बन चुका है। मलबे से उबरकर फिर से संवरते बाग, बहाल होती सड़कें और लौटती आजीविका इस बात का प्रमाण हैं कि आपदा के बाद भी मजबूत इच्छाशक्ति और सुनियोजित प्रयासों से नई शुरुआत संभव है।




