अनुज नेगी
लैंसडाउन : एक ओर सरकार जनता की समस्याओं को सुनने के लिए “ सरकार जनता के द्वार” जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम चला रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों में बैठे कुछ गैर-जिम्मेदार अधिकारी सरकार के इन दावों की सरेआम पोल खोलते नज़र आ रहे हैं।
मामला जनपद पौड़ी गढ़वाल की लैंसडाउन विधानसभा अंतर्गत रिखणीखाल तहसील के ग्राम गवाड़ा एवं अमडंडा का है। शासन द्वारा ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के लिए 14 जनवरी को ग्राम गवाड़ा तथा 15 जनवरी को ग्राम अमडंडा में सरकार जनता के द्वार कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम के लिए संदीप तोमर, कृषि संरक्षण अधिकारी सतपुली को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन कार्यक्रम के दौरान नोडल अधिकारी महोदय मौके से पूरी तरह नदारद पाए गए। नोडल अधिकारी के अनुपस्थित रहने से ग्रामीणों की समस्याएं सुने जाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई और कार्यक्रम की गंभीरता पर सवाल खड़े हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही कार्यक्रम में मौजूद नहीं होंगे, तो जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता और राजनीतिक दिखावा बनकर रह गया है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी, या फिर जनता यूं ही उम्मीद लगाए बैठी रहेगी?




