विकासनगर तहसील चर्चाओं में, लक्ष्मीपुर में उपजे भूमि विवाद के बाद तहसील प्रशासन पर उठते गंभीर सवाल
कई जमीनों की पत्रावलियां गायब तो
बीते एक सप्ताह से विकासनगर तहसील के लक्ष्मीपुर के चांचक गांव में सरकारी भूमि कब्जाने का मामला उजागर हुआ था
जिसमे तहसीलदार व पटवारी पर लेन देन के आरोप लगे थे
आरोप लगने के कारण भी ठोस थे
पहला कारण कि पटवारी या तहसीलदार वो कर्मचारी या अधिकारी होता है जिसके पास पूरी तहसील के सरकारी एवं गैर सरकारी भूमि का लेखा जोखा होता है
तो फिर पटवारी तहसीलदार ने उक्त सरकारी भूमि से पेड कटते समय क्यों नहीं रोका गया ओर क्यों पेड काटने की अनुमति पटवारी द्वारा दी गई
आखिर लाखों रूपये की लकड़ी कहा गई
ज़ब दूसरे दिन सोशल मीडिया में तहसीलदार पटवारी लेन देन का मामला उठा तो
आनन फ़ानन में छुट्टी के दिन तहसीलदार महोदय ने मौके पर दुबारा पैमाइस की गई ओर उक्त जगह नाप भूमि के बजाय सरकारी भूमि होना बताया गया साथ ही जगह मौके पर 5 मीटर फालतू निकल गई
सवाल इसमें पैदा होता है कि क्या पहले दिन की पैमाइस गलत थी ओर यदि गलत थी तो क्यों
किसके दबाव में पहले दिन कार्य हुआ ओर मौके से लकड़ी उठी
पटवारी पर भी गंभीर सवाल खडे हो रहे है ओर हों भी क्यों न पटवारियों के आशीर्वाद के कारण ही पछवादून की जमीनों पर माफिया ने कब्जा किया ओर बेच के चल दिया
इसके बाद सोशल मीडिया पर कोबरा न्यूज़ सहित दो ओर चैनलों के खिलाफ तहसीलदार महोदय ने तहरीर दी कि उनकी छवि खराब की गई है
तो महोदय आपकी छवि हमने नहीं बल्कि आपकी कार्यवाही ने की
रही बात सवालों की तो आप तहसील के मालिक हो बताओ ठाकुर पुर ग्राम पंचायत की सरकारी भूमि की पत्रावली कहा गुम हुई
जो विवाद इस भूमि में उपजा है उसमे रासिद पहलवान के भाई का नाम आ रहा जबकि इन भाइयों का नाम तो अन्य जगह में भी आया चाहे इसी भूमि के सामने रेशम विभाग से लेकर आगे तक ये भूमि कब्जा की गई है इसपर आपने कार्यवाही क्यों नहीं की
इन्ही के द्वारा चोई में कई बीघा सरकारी भूमि कब्जाकार बेचीं गई है इस पर क्यों कार्यवाही नहीं हुई
शंकरपुर खाले से लगती भूमि पर क्यों कार्यवाही नहीं हुई
ईदगाह में दुकाने काटी गई क्या कार्यवाही हुई
सिंघनीवाला गांव सहित अन्य जगह पर भी उक्त लोगो द्वारा ही सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया क्या कार्यवाही हुई
कोट से उक्त लोगो की फाइले गायब हो जाती है
आखिर आपका प्रशासन इन पर क्यों मेहरवान है
ये बहुत कम है यदि sit जाँच आपकी तहसील की सरकारी भूमि की हो तो बड्डे बड़े खुलासे हो सकते है 70% भूमि तहसील प्रसाशन की वजह से कब्जाई गई है ओर इसमें कुछ भ्रष्ट अधिकारियो कर्मचारियों के बच्चे भी पलें होंगे
इसलिए सवाल तो गंभीर उठेंगे आपकी तरफ क्योंकि तहसीलदार तहसील का सबसे बड़ा ओर जिम्मेदार अधिकारी होता है
आपको कुछ समय पहले हमारे द्वारा रामपुर छोटा नदी में लगती सरकारी भूमि पर प्लॉटिंग की शिकायत की गई थी कानूनगो पटवारी आये कहा भी गया कि उक्त भूमि में सरकारी भूमि है क्या कार्यवाही की आपने वहाँ तो धड़ाधड़ प्लॉटिंग बिक रही है
सवाल बहुत है आप इतनो का जबाब दीजिए पहले जनता को उन गावों के लोगो को जिनके हिस्से की भूमि ठिकाने लगी
क्योंकि सरकारी भूमि ग्राम सभा के लोगो के विकास के लिए यूज होती है जबकि आपके प्रशासन की वजह से वो भूमि माफिया भोले भाले लोगो को बेच चुका है
आपकी तहसील से ही उसकी रजिस्ट्री हो जाति है ओर तो ओर इस तहसील में ऐसा भी हो रहा है कि जमीन कही ओर ही है ओर कब्जा कही ओर ही हो गया
कारनामें बहुत बड़े बड़े है आपकी तहसील के खराखेत गांव में scst की सैकड़ों बीघा भूमि कैसे बिकी
बोक्सा जनजाति की भूमि आखिर किन नियमों के तहत खुर्द बुर्द हुई
झांजरा में बड़े अस्पताल के पीछे सरकारी भूमि पर कब्जे हो गया इस में भी भूमि कही ओर कब्जा यहां हुआ है
सवाल बहुत है पर फिलहाल इतना ही




