उत्तराखंड: 210 करोड़ के बेनामी संपत्ति घोटाले में आया भूचाल; कैबिनेट मंत्री और उनके पति के खिलाफ ED, CBI, विजिलेंस और लोकायुक्त में महा-शिकायत दर्ज!
थाना कैंट में दर्ज FIR No. 0158/2026 और आरोपी पति के वीडियो बयानों को बनाया गया मुख्य आधार।

सुप्रीम कोर्ट की नजीरों का हवाला देकर केंद्रीय जांच एजेंसियों से PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग जांच की मांग।
देहरादून:
देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक कथित हाई-प्रोफाइल वित्तीय घोटाले ने भूचाल ला दिया है। उत्तराखंड सरकार की महिला एवं बाल विकास कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ जनधन की खुली लूट और 210 करोड़ रुपये की अकूत अवैध/बेनामी संपत्ति अर्जित करने के मामले में एक सचेत नागरिक द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), सतर्कता विभाग (Vigilance) और लोकायुक्त में आधिकारिक तौर पर ‘मास्टर लीगल शिकायत’ दर्ज करा दी गई है।
एफआईआर और पति के ‘कबूलनामा’ पर टिकी है महा-शिकायत
शिकायतकर्ता मंसा Ram उनियाल (सचेत नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता) द्वारा दी गई विधिक शिकायत के अनुसार, देहरादून के कैंट थाने में दर्ज FIR No. 0158/2026 (दिनांक 15.10.2026) में गंभीर धाराएं दर्ज हैं। इस एफआईआर में एक तरफ जहां मंत्री द्वारा पति पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के आरोप हैं, वहीं सह-आरोपी पति गिरधारी लाल साहू ने अपने सार्वजनिक वीडियो बयानों में यह स्वीकार किया है कि मंत्री के पास लगभग 210 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति है।
शिकायत में सर्वोच्च कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों (Lalita Kumari vs. Govt of U.P. और State of Punjab vs. Davinder Pal Singh Bhullar) का हवाला देते हुए इसे ‘Admission against Interest’ (स्वयं के विरुद्ध प्रस्वीकृति) बताया गया है, जो केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED & CBI) के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज करने का सबसे पुख्ता विधिक आधार है।
एसआईटी की ताबड़तोड़ दबिश और हाईकोर्ट में याचिका
सूत्रों और आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, 38 से अधिक संगीन मुकदमों (हत्या, गैंगस्टर एक्ट आदि) का सामना कर रहे मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और एसआईटी (SIT) द्वारा बरेली और हल्द्वानी समेत 6 से अधिक ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। आरोपी द्वारा नैनीताल हाईकोर्ट में एफआईआर को रद्द करने के लिए दायर याचिका (WPCRL/2167/2026) पर भी तत्काल कोई फौरी राहत न मिलने के बाद से इस मामले में कानूनी शिकंजा और कस गया है।
प्रमुख मांगें, जो बनीं चर्चा का विषय:
ED और CBI जांच: 210 करोड़ के इस बेनामी साम्राज्य की प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई द्वारा PMLA के तहत उच्चस्तरीय मनी लॉन्ड्रिंग जांच हो।
तत्काल अटैचमेंट (Attachment): सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने के लिए सभी संबंधित संपत्तियों, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड्स को तुरंत सीज किया जाए।
स्वतंत्र न्यायिक जांच: महिला एवं बाल विकास विभाग में हुए कथित वित्तीय घोटालों और पद के दुरुपयोग की विजिलेंस एवं लोकायुक्त के माध्यम से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो।
इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण के खुलासे और केंद्रीय एजेंसियों को भेजी गई महा-शिकायत के बाद अब सियासी और प्रशासनिक हल्कों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या इस सिंडिकेट पर शिकंजा कसेगा या नहीं??




