देहरादून में प्रेशर हॉर्न और रेट्रो साइलेंसर के मामले में मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, SSP से 3 नवंबर तक माँगी आख्या
देहरादून शहर में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न, अवैध रेट्रो साइलेंसर, ध्वनि प्रदूषण और रैश ड्राइविंग के मामले में उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), देहरादून से रिपोर्ट तलब की है।
शहर के निवासी एडवोकेट जसविंदर सिंह ने 20 जुलाई 2026 को आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बताया कि शहर की सड़कों, गली और मोहल्लों में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न और तेज़ आवाज़ वाले मॉडिफाइड साइलेंसरों का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है।
इससे बुज़ुर्गों, बच्चों और मरीज़ों समेत आम नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखती।
शिकायत पर विचार के बाद आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने 28 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया। आयोग ने माना कि प्रकरण “अत्यंत गंभीर प्रकृति का” है और यह स्थिति आमतौर पर शहर, गली और मोहल्लों में दिखाई देती है।
आयोग ने शिकायत की प्रति SSP देहरादून को भेजने और नियत तिथि तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मामले की पत्रावली 3 नवंबर 2026 को आयोग के समक्ष पेश होगी।
आयोग ने 3 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में यह भी स्पष्ट किया है कि अपेक्षित कार्यवाही न होने पर वह विचार के बाद उचित आदेश पारित करेगा। मामला केस नंबर 1150/35/5/2026 के रूप में दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता का वक्तव्य: “आयोग द्वारा मामले को गंभीर मानकर संज्ञान लेना सराहनीय है। मुझे उम्मीद है कि पुलिस और संबंधित विभाग इस पर ठोस कदम उठाएँगे। यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, पूरे शहर के जनहित का विषय है। जन-सुधार और जन-विकास के लिए मेरे प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। मैं आयोग का आभारी हूँ।”
संपर्क:
एडवोकेट जसविंदर सिंह
मोबाइल: 9720999913
देहरादून, उत्तराखंड
संलग्न: आयोग का आदेश एवं नोटिस की प्रति




